This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful.
New Zealand के खिलाफ टेस्ट मैच के दौरान England ने उठाया ऐसा कदम, भड़क उठे Michael Holding
माइकल होल्डिंग का मानना इंग्लैंड बीएलएम आंदोलन का समर्थन करने के बजाय फिर से ‘ऑल लाइव्स मैटर’ जैसा दिखावा कर रहा है.
Written by India.com Staff
Last Published on - June 12, 2021 3:37 PM IST

इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के खिलाफ इस वक्त दो टेस्ट मैचों की सीरीज जारी है. इस बीच वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज माइकल होल्डिंग (Michael Holding) ने इंग्लैंड टीम द्वारा उठाए गए एक कदम पर नाराजगी जताई है. होल्डिंग ने न्यूजीलैंड के खिलाफ चल रही टेस्ट शृंखला में इंग्लैंड क्रिकेट टीम के ‘मोमेंट ऑफ यूनिटी (Moment Of Unity)’ की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि यह ‘ब्लैक लाइव्स मैटर (Black Lives Matter)’ आंदोलन का समर्थन नहीं कर रहा था, बल्कि ‘ऑल लाइव्स मैटर (All Lives Matter)’ से जुडी सोच को दर्शा रहा है.
इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने पिछले साल वेस्टइंडीज के खिलाफ शृंखला के दौरान ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ आंदोलन के समय घुटने नहीं टेकने का फैसला करते हुए किसी भी नस्लवाद, धार्मिक असहिष्णुता, लिंगवाद और अन्य भेदभाव के खिलाफ संदेश वाली टी-शर्ट पहनी थी.
होल्डिंग क्रिकेट और व्यापक समुदाय में समानता का समर्थन करते हैं और उनका मानना इंग्लैंड के खिलाड़ी बीएलएम आंदोलन का समर्थन करने के बजाय फिर से ‘ऑल लाइव्स मैटर’ जैसा दिखावा कर रहे हैं.
इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने न्यूजीलैंड के खिलाफ दो जून से शुरु हुए पहले टेस्ट मैच के दौरान भी भेदभाव के खिलाफ ‘मोमेंट ऑफ यूनिटी’ का संदेश देता हुए टी-शर्ट पहना था.
होल्डिंग ने स्काई स्पोर्ट्स से कहा, ‘‘इंग्लैंड (क्रिकेट) टीम ‘मोमेंट ऑफ यूनिटी’ के साथ अभी क्या कर रही है, यह ’ब्लैक लाइव्स मैटर’ का समर्थन नहीं कर रहा है. जब मैं कहता हूं ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ तो आप कहते हैं ‘ऑल लाइव्स मैटर’.’’
इस 67 साल के पूर्व दिग्गज ने आलोचनओं के बाद भी इंग्लैंड की फुटबॉल टीम द्वारा घुटनों के बल बैठ कर ’ब्लैक लाइव्स मैटर’ के समर्थन की तारीफ की. पिछले साल अमेरिका में श्वेत पुलिस अधिकारी के दमन से अश्वेत जॉर्ज फ्लायड की मौत के बाद दुनिया भर में नस्लवाद के मुद्दे पर बहस शुरू हुई थी.
