"अगर BLM अभियान का समर्थन नहीं करना चाहते तो साफ कह दें, बहाने ना बनाएं"

इंग्लैंड क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के दौरान ब्लैक लाइव्स मैटर अभियान के तहत घुटने नहीं टेके थे।

Edited By : Cricket Country Staff |Sep 11, 2020, 12:52 PM IST

Published On Sep 11, 2020, 12:52 PM IST

Last UpdatedSep 11, 2020, 12:52 PM IST

इंग्लैंड-वेस्टइंडीज टेस्ट मैच के दौरान नस्लवाद के खिलाफ विरोध जताने के लिए घुटने टेकते खिलाड़ी (Twitter)

पूर्व वेस्टइंडीज तेज गेंदबाज माइकल होल्डिंग ने ब्लैक लाइव मैटर्स अभियान के तहत ‘घुटने ना टेकने’ के लिए इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया टीम की आलोचना की है। इंग्लैंड टीम ने सीजन की शुरुआत में वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज के दौरान नस्लवाद के खिलाफ विरोध जताने के लिए मैच से पहले मैदान पर घुटने टेके थे लेकिन पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के दौरान ऐसा नहीं किया गया, जिससे होल्डिंग को ऐतराज है।

स्काई स्पोर्ट्स से बातचीत में होल्डिंग ने कहा, “अब जबकि वेस्टइंडीज टीम चली गई है तो इसका ये मतलब नहीं कि आप इस संदेश का सम्मान नहीं करेंगे और इसके लिए खड़े नहीं होंगे।”

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पूर्व दिग्गज ने कहा, “हां, नस्लवाद बाकी जगहों के मुकाबले यूनाइटेस स्टेट्स में ज्यादा प्रभावी तरह से फैसला हुआ है लेकिन दुनिया भर के लोगों ने इस संदेश को कि ये समानता का समय है और समान न्याय का समय है फैलाने की जिम्मेदारी उठा ई है।”

उन्होंने कहा, “ये केवल श्वेत बनाम अश्वेत का मुद्दा नहीं था। इसलिए पाकिस्तान और इंग्लैंड के ऐसा ना करने और फिर ईसीबी के इसके लिए बहुत ही लचर बहाना देने से मैं काफी चिंतित हूं।”

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दरअसल ईसीबी ने अपने बयान में कहा था कि वो “दीर्घकालिक और सतत परिवर्तन” के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसके लिए उन्होंने “पहल” की शुरुआत की है जो क्रिकेट के सभी क्षेत्रों से भेदभाव को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित करती है।

इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज शुरू होने से पहले ऑस्ट्रेलियाई कप्तान एरोन फिंच ने कहा था कि उनकी टीम इस अभियान के तहत घुटने नहीं टेकेगी क्योंकि ‘लोगों को शिक्षित करना विरोध करने से अहम है’।

होल्डिंग से इस बयान के लिए फिंच की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा, “फिंच ये कह रहा है कि वो ऐसे खेल का हिस्सा बनकर खुश है जहां किसी को भी उसके रंग, जाति, धर्म या जेंडर की वजह से खेलने से नहीं रोका जाता। मैं ऐसे किसी खेल के बारे में नहीं जानता जहां किसी को इनमें से किसी भी चीज की वजह से रोका जाता है। तो ये एक बकवास बयान है।”

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उन्होंने कहा, “मैं यहां किसी को वो करने के लिए मजबूर करने नहीं आया, जो वो नहीं करना चाहते। अगर आपको लगता है कि आपको इस आंदोलन से सहानुभूति रखने और उसे पहचानने की जरूरत नहीं है, तो बस इतना ही कह दें। बेकार के बहाने ना बनाएं।”

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