सुप्रीम कोर्ट बीसीसीआी के आदेशों का पालन न करने से रुष्ट है  © PTI
सुप्रीम कोर्ट बीसीसीआई के आदेशों का पालन न करने से रुष्ट है © PTI

जस्टिस एलएम लोढ़ा समिति के आदेश के तहत बीसीसीआई के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। इस बात से खिसियाए बीसीसीआई ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच वर्तमान में खेली जा रही क्रिकेट सीरीज को रद्द करने का फैसला किया है। इस सीरीज में अभी 1 टेस्ट और 5 वनडे मैच खेले जाने बाकी हैं। बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, बोर्ड को यह फैसला मजबूरी में लेना पड़ा क्योंकि उसके हाथ बंधे हुए हैं। बीसीसीआई के एक उच्च अधिकारी ने कहा, “हमारे पास सीरीज को रद्द करने के सिवाय कोई उपाय नहीं बचा है क्योंकि हमारे बैंकों ने बीसीसीआई अकाउंट को फ्रीज करने का निश्चिय कर लिया है। हम नहीं चाहते कि भारत दुनियाभर के सामने अपमानित हो। हम कैसे फंक्शन करेंगे। हम कैसे किसी मैच का आयोजन करेंगे। हम कैसे भुगतान करेंगे? अकाउंट को फ्रीज करना कोई मजाक नहीं है। एक अंतरराष्ट्रीय टीम यहां है और बहुत कुछ दाव पर लगा हुआ है।”

बोर्ड ने इस कठोर कदम को उठाने का फैसला उस वक्त लिया जब लोढ़ा पैनल ने बैंक को लेटर जारी किया, जिसमें उनसे कहा गया था कि बीसीसीआई को फंड न दिया जाए। लेटर में बताया गया है, “समिति के नोटिस में यह बात आई की 30 सितंबर को बीसीसीआई की ‘इमर्जेंट वर्किंग कमिटी’ में कुछ निर्णय लिए गए जिसमें विभिन्न संघों के सदस्यों के बड़े धन को चुकाने की बात की गई।”

इसमें आगे कहा गया है, “जैसा कि स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक गुरुवार 6.10.2016 को रखी जाएगी, आपको ये निर्देश दिए जाते हैं कि वित्तीय अदायगी की ओर कोई कदम न बढ़ाएं जो 31.08.2016 की तीराख को अनुमोदित/सुलझाया गया था। इस निर्देश का कोई भी उल्लंघन उचित निर्देश के लिए सुप्रीम कोर्ट के आगे रखा जाएगा”

लेटर बीसीसीआई सचिन अजय शिर्के, सीईओ राहुल जौहरी और कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी नाम पर भी लिखा गया था। समिति ने कहा “आपको पता है कि समिति के 31.8.2016 के मुताबिक, आगे के निर्णय नहीं लिए जा सकते, रुटीन मामलों को छोड़कर। इस राशि की अदायगी रुटीन नहीं है और किसी भी मामले में आकस्मिक नहीं है।”

पैनल काफी गुस्से में था क्योंकि बोर्ड ने समिति की सिफारिशों को लागू करने की पहली तारीख मिस कर दी थी। “आप इसे भी जानते हैं कि बीसीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के उल्लंघन को चुना साथ ही समिति द्वारा पहले सेट की टाइमलाइन का भी उल्लंघन किया जिसमें वित्त अदायगी पॉलिसी शामिल थी जिसे 30.9.2016 तक फ्रेम किया जाना था।”