Mike Brearley worries about Virat Kohli getting detached from the game
Virat Kohli© Getty Images

भारतीय कप्तान विराट कोहली को उनके आक्रामक स्वभाव के लिए जाना जाता है। कोहली की बल्लेबाजी के साथ साथ उनकी कप्तानी में भी ये साफ नजर आता है। कप्तानी और बल्लेबाजी में दुनिया भर के रिकॉर्ड बना चुके कोहली हमेशा ही ये कहते हैं उन्हें किसी को कुछ साबित करने की जरूरत नहीं है। कोहली का ये स्वभाव उनके खेल को बेहतर बनाता है और उनके लिए सकारात्मक रूप से काम करता है। हालांकि पूर्व इंग्लिश कप्तान माइक ब्रेरले को ये डर है कि इस तरह से कोहली खुद को खेल से अलग कर लेंगे।

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टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए बयान में कोहली ने कहा, “विराट अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त करता है। जुनून और खेल में भागीदारी के बारे में बहुत कुछ कहा जा सकता है लेकिन इसके नुकसान भी हैं। हर शख्स अपनी तरीके से ये करता है। मैं उसके थोड़ा निष्क्रिय और खेल के आखिर में एकदम अलग होने को लेकर चिंतित हूं, जैसा कि उसने एडिलेड मैच में किया था, जब ऑस्ट्रेलिया मैच में आगे था।”

एडिलेड टेस्ट के आखिरी दिन जब ऑस्ट्रेलिया टीम का निचला क्रम बल्लेबाजी कर रहा था, तब एक समय के लिए मैच भारत से दूर जाता दिख रहा था। इस दौरान कोहली अपने स्वभाव से विपरीत एकदम शांत नजर आ रहे थे। मैच के बाद कोहली ने कहा भी था, कि हालात को देखते हुए वो जितना हो सके शांत रहने की कोशिश कर रहे थे।

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ब्रेरली ने एक ही खिलाड़ी के सभी फॉर्मेट में कप्तानी करने पर भी बात की। उन्होंने कहा, “अगर बतौर कप्तान और बल्लेबाज वो अच्छे फॉर्म में है तो तीनों फॉर्मेट में कप्तानी करना  सही है। फायदा ये है कि उसे लगेगा कि सारी टीम उसकी ही हैं। हालांकि इसमें खिलाड़ी के थक जाने का नुकसान है। उदाहरण के तौर पर रूट और मॉर्गन एक साथ मिलकर वनडे और टी0 में अच्छा काम कर रहे हैं और रूट प्रदर्शन में सुधार कर टेस्ट में और अच्छा कर रहा है। इसलिए ये भी काम करता है।”