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पनेसर ने नस्लवाद को लेकर दिया बड़ा बयान, बोले-होल्डिंग के बयान ने मुझे झकझोर दिया है

बोले-अश्वेत समुदाय की कोई गलती नहीं होने पर भी पुलिस उन्हें दंडित करती है

Edited By : Cricket Country Staff |Jul 15, 2020, 09:15 AM IST

Published On Jul 15, 2020, 09:15 AM IST

Last UpdatedJul 15, 2020, 09:15 AM IST

Monty Panesar @twitter

पिछले कुछ समय से नस्लवाद का मुद्दा काफी गरमाया हुआ है। समूचे क्रिकेट जगत की तरह भारतीय मूल के इंग्लैंड के पूर्व स्पिन गेंदबाज मोंटी पनेसर को भी वेस्टइंडीज के महान क्रिकेटर माइकल होल्डिंग के नस्लवाद पर दिए गए भाषण ने झकझोर दिया है।

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पनेसर का मानना है कि ब्रिटेन में दक्षिण एशियाई प्रवासियों को यदा कदा ही नस्लवाद का सामना करना पड़ता है लेकिन इसकी तुलना अश्वेत समुदाय के साथ रोजमर्रा की जिंदगी में हो रहे बर्ताव से नहीं की जा सकती।

पनेसर ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि उनके देश में अश्वेत समुदाय के साथ नस्लवाद खत्म होना चाहिए और अधिकारियों को पांच साल की योजना बनाकर इसे खत्म करना चाहिए। उन्होंने कहा ,‘यदि कोई यहां काला रंग चढी खिड़कियों वाली कार चलाता है और वह अश्वेत है तो पुलिस उसकी कार जरूर रोकेगी। यहां अश्वेत लोग रोज पुलिस के खौफ के साये में जीते हैं ।’

50 टेस्ट खेल चुके हैं पनेसर

इंग्लैंड के लिए 50 टेस्ट में 167 विकेट ले चुके पनेसर ने कहा ,‘यह मेरे अश्वेत दोस्त बताते हैं । वे सुपरमार्केट जाते हैं तो लोगों को उन पर चोरी का शक होता है । यदि मैं जेब में कुछ रख लूं तो कोई ध्यान नहीं देगा लेकिन वे कुछ नहीं करते हैं तो भी उन पर शक रहता है ।’

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उन्होंने कहा ,‘पांच साल की योजना बनाकर इसे खत्म किया जाना चाहिए। भाषणों के बाद भी कुछ किया नहीं जाता तो फिर क्या फायदा । मैने माइकल होल्डिंग जैसा दमदार भाषण किसी का नहीं देखा । और क्रिकेट के जरिए ही नस्लवाद को खत्म करने से बेहतर क्या हो सकता है।’

‘दक्षिण एशियाई समुदाय को यदा कदा ही सुनना पड़ता है’

पनेसर ने कहा ,‘दक्षिण एशियाई समुदाय को यदा कदा ही सुनना पड़ता है लेकिन अश्वेतों को नियमित आधार पर यह सब सहना पड़ता है । सिख समुदाय दशकों से समाज सेवा कर रहा है और प्यार का संदेश फैला रहा है । लोग उसकी सराहना करके हमें वह प्यार लौटाते हैं ।’

बकौल पनेसर ,‘लेकिन अश्वेत समुदाय की कोई गलती नहीं होने पर भी पुलिस उन्हें दंडित करती है । अब उन पर से यह कलंक हटाना होगा । उन्हें शिक्षित करके दूसरों की तरह सफेदपोश नौकरियां दी जानी चाहिए।’

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