motera likely to escape icc sanctions as final test pitch might support batting
नरेंद्र मोदी स्टेडियम @BCCITwitter

भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए डे-नाइट टेस्ट (Day Night Test) मैच की पिच अभी तक सुर्खियों में हैं, जबकि सीरीज का चौथा और आखिरी टेस्ट मैच भी इसी मैदान पर खेला जाना है. पिंक बॉल टेस्ट में मोटेरा की पिच भले ही आलोचकों के निशाने पर रही हो लेकिन अब अंतिम टेस्ट मैच के लिए तैयार की जा रही पिच बल्लेबाजों के लिए मददगार हो सकती है. जानकार जोर दे रहे हैं कि आईसीसी को पिच के चलते इस मैदान पर ऐक्शन लेना चाहिए. हालांकि ऐसी संभावना नहीं है क्योंकि अंतिम टेस्ट की पिच आलोचकों की राय बदल सकती है.

भारत फिलहाल 4 टेस्ट की सीरीज में 2-1 से आगे चल रहा है और आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (ICC World Test Championship) के फाइनल में क्वॉलीफाई करने के लिए उसे अंतिम टेस्ट को सिर्फ ड्रॉ कराना होगा. टेस्ट चैंपियनशिप का यह फाइनल ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर 18-22 जून को खेला जाएगा. पिंक बॉल टेस्ट के बाद अब नरेंद्र मोदी स्टेडियम में एक और स्पिन की अनुकूल पिच की संभावना कम है. क्योंकि घरेलू टीम पिच को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती.

मामले की जानकारी रखने वाले भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर पीटीआई को बताया, ‘अच्छी पिच की उम्मीद है, जो ठोस रहेगी और समान उछाल मिलेगा. यह बल्लेबाजी के अनुकूल होगी और यह पारंपरिक लाल गेंद का टेस्ट मैच होगा इसलिए यहां 4 से 8 मार्च तक होने वाले मुकाबले में काफी बड़े स्कोर की उम्मीद की जा सकती है.’

बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियों के साथ टीम प्रबंधन भी समझता है कि धूल से भरी एक और पिच नए स्थल के लिए अच्छी नहीं होगी, जिसके इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) और आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप के दौरान कई महत्वपूर्ण मैचों की मेजबानी करने की संभावना है.

बीसीसीआई अधिकारी ने कहा, ‘अगर एक ही स्थल पर दो मैच होते हैं तो आप एक नतीजे को अलग नहीं कर सकते. अंतिम टेस्ट होने दीजिए और इसके बाद ही मैच रैफरी जवागल श्रीनाथ की रिपोर्ट के आधार पर आईसीसी अपनी कार्रवाई को लेकर फैसला करेगा. साथ ही अब तक इंग्लैंड की टीम ने भी कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है.’

अगर एक ही स्थल पर एक अच्छी और एक खराब पिच होती है तो आईसीसी के कार्रवाई करने की संभावना नहीं है. भारत सीरीज को 3-1 से अपने नाम करके खुश होगा लेकिन टीम को नतीजा देने वाली स्पिन की अनुकूल पिच की जरूरत नहीं है क्योंकि उसके लिए ड्रॉ ही काफी है. साथ ही भारतीय टीम प्रबंधन ऐसी पिच नहीं चाहता जिस पर बेहद महत्वपूर्ण मैच में खेलते हुए उसे नुकसान उठाना पड़े.

उन्होंने कहा, ‘गुलाबी गेंद का टेस्ट अच्छा रहा क्योंकि यह गेंद से अधिक जुड़ा हुआ मामला था. गेंद पिच पर गिरकर तेजी से आ रही थी, जबकि पिच में कोई समस्या नहीं थी जैसा इंग्लैंड के कई पूर्व दिग्गज खिलाड़ी कह रहे हैं. वे सीधी गेंदों का सामना करने में नाकाम रहे. लेकिन इस तरह की पिचें अपने ऊपर भी भारी पड़ सकती हैं और बीसीसीआई को इसकी अच्छी तरह जानकारी है.’