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अब वो पुराने दिन कभी नहीं आएंगे जब एमएस धोनी विपक्षी टीम के बल्लेबाजों को हाथ में गेंद आने का बहाना करते हुए हाथ स्टंप की ओर ले जाते थे और बल्लेबाज थोड़ी देर के लिए हक्का-बक्का रह जाता था। अब अगर एमएस धोनी ऐसा करेंगे तो आईसीसी के नए नियम फेक फील्डिंग के अंतर्गत उन्हें इसका हर्जाना भुगतना होगा। यह नया नियम 28 सितंबर से प्रभाव में आया है। नया नियम 41.5 बताता है, “अगर कोई फील्डर बल्लेबाज का ध्यान जानबूझकर अपनी किसी हरकत या शब्दों से भंग करता है तो यह सही नहीं माना जाएगा” अगर मैदान में खड़े अंपायरों को लगता है कि वह हरकत फील्डर ने जानबूझकर की है, तो वे बैटिंग टीम को 5 अतिरिक्त रन दे सकते हैं।

यह नया नियम 28 सितंबर 2017 को लागू हुआ था और उसका पहला शिकार 24 घंटों में ही एक फील्डर बन गया। क्वींसलैंड के इस फील्डर मार्नस लैबुचाग्ने ने जेएलटी वनडे कप के दौरान बल्लेबाज को चौंकाने के लिए हाथ में गेंद आए बगैर थ्रो फेंकने का इशारा किया था। इसी वजह से अंपायर ने उन्हें फेक फील्डिंग का दोषी पाया और विपक्षी टीम को 5 रन मुफ्त में दे दिए।

 

 

जब से क्रिकेट शुरू हुआ तबसे ही विपक्षी टीम के फील्डर एक-दूसरे को इस तरह के इशारे करके चौंकाते रहे हैं ताकि वे विपक्षी बल्लेबाजों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना सकें। वैसे इस नियम के चलते मैदानी अंपायरों पर यह दबाव जरूर होगा कि वे किसे जानबूझकर थ्रो फेंकना कहेंगे। बुधवार को पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कॉमेंटेटर संजय मांजरेकर ने आईसीसी के इस नए नियम की कड़े शब्दों में आलोचना की। सिलसिलेवार ट्वीट में मांजरेकर ने कहा, “फेक फील्डिंग के लिए 5 पेनल्टी रन हाल फिलहाल में लाया गया सबसे हास्यास्पद नियम है। आईसीसी से आग्रह करता हूं वे इस पर फिर से विचार करें।”

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उन्होंने दूसरे ट्वीट में कहा, “जब बल्लेबाज एक कदम निकलकर बाहर आता है और रन नहीं लेता तो बैटिंग करने वाली टीम पर 5 रन की पैनल्टी लगाना कैसा है। फेक नियम को खत्म करना चाहिए।” इसी बीच एक ट्विटर यूजर ने मांजरेकर को जवाब देते हुए कहा कि इस नियम को एमसीसी लाई है ताकि खिलाड़ियों को बेइमानी करने से रोका जा सके। इस पर जवाब देते हुए मांजरेकर ने कहा फेक फील्डिंग का नियम एक ट्रिक है चीटिंग नहीं। मांजरेकर ने अपने बयान को सही साबित करने के लिए धोनी का उदाहरण भी दिया। वैसे मांजरेकर ने यह भी लिखा कि उन्होंने इस बारे में आईसीसी को भी लिखा है। बहरहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि आईसीसी उनके लेटर का क्या जवाब देती है।