एमएस धोनी © Getty Images
एमएस धोनी © Getty Images

पल्लेकेले में खेले गए दूसरे वनडे में एमएस धोनी उस वक्त भाग्यशाली रहे थे जब एक गेंद उनके शरीर को लगकर सीधे स्टंप्स पर जा लगी थी लेकिन गेंद की रफ्तार कम होने के कारण बेल्स नहीं गिरीं। इसके अलावा एक और आश्चर्य वाली बात रही और वो थी कि एलईडी लाइट भी नहीं जली। इस बारे में स्पष्टीकरण अब सामने आया है। दरअसल श्रीलंका क्रिकेट इस सीरीज में जिंग्स टेक्नॉलजी का इस्तेमाल कर रहा है। इसने गेम में क्रांति ला दी है। इस बात का स्पष्टीकरण एक ऑस्ट्रेलिया की कंपनी के डायरेक्टर डेविड लाइटरवुड ने दिया। लाइटरवुड ने कहा, “वे जिंग्स हैं, एलईडी बेल्स नहीं हैं।”

क्रिकेट के नियम के मुताबिक बल्लेबाज को तभी आउट माना जाता है जब दोनों बेल्स गिर जाएं, अगर गेंद स्टंप्स पर लगने के बावजूद बेल्स नहीं गिरती तो बल्लेबाज को आउट नहीं माना जाएगा। यह सिर्फ तभी होता है जब गेंद बहुत हल्के से स्टंप्स पर लगे। वहीं बात करें इस नई तकनीकी जिंग्स की तो यह तभी जलती हैं जब स्टंप्स में लगी दोनों बेल्स हिलती हैं। धोनी के मामले को देखा जाए तो इस दौरान गेंद स्टंप्स से बहुत धीमे से लगी थी जिसके कारण दोनों बेल्स नहीं हिलीं और जिंग्स की लाइट नहीं चमकी।  तीसरे वनडे में एमएस धोनी बनाएंगे ’2 शतक’?

जिंग्स वैसे क्रिकेट के नियम बनाने वालों को इस दिशा में नियम बनाने में मदद कर सकता है कि वे बेल्स के गिरे बगैर जिंग्स की लाइट जलने पर ही बल्लेबाज को आउट करार दे दें। वह इसलिए क्योंकि बल्लेबाजों के स्टंप्स पर गेंद लगने के बावजूद बेल्स न गिरने के मामले में खूब आ रहे हैं। वैसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अभी जिंग्स का इस्तेमाल हर जगह नहीं हो रहा है। जैसे ही सभी मैचों में जिंग्स टेक्नॉलजी का इस्तेमाल होने लगेगा तो हम आशा कर सकते हैं कि इस संबंध में क्रिकेट के नियम बनाने के बारे में कदम उठाया जा सकता है।