नरसिंह का नाम रियो के लिए भेजा जा चुका है: डब्ल्यूएफआई
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भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि उसने तीन मई को ही 74 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में भारत के प्रतिनिधित्व के लिए नरसिंह पंचम यादव का नाम भेज दिया था। न्यायमूर्ति मनमोहन ने इस मामले में अपना फैसला 6 जून तक के लिए सुरक्षित कर लिया। न्यायालय दो बार के ओलम्पिक पदक विजेता सुशील कुमार की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। सुशील इस वर्ग में ओलम्पिक प्रतिनिधित्व चाहते हैं लेकिन नरसिंह पहले ही इस वर्ग में ओलम्पिक कोटा हासिल कर चुके हैं। सुशील चाहते हैं कि ट्रायल के माध्यम से फैसला हो कि कौन रियो जाएगा और इसी के लिए वह न्यायालय की शरण में हैं।

महासंघ ने अदालत से कहा कि जब सुशील को अन्य भारतीय पहलवानों के साथ इस साल की शुरुआत में जॉर्जिया भेजा गया था, तब उन्होंने भारतीय शिविर छोड़ दिया था और जार्जिया की राष्ट्रीय टीम के साथ रहकर अभ्यास किया था।

डब्ल्यूएफआई ने अदालत के सामने अपने पक्ष रखते हुए कहा, “सुशील ने सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया। सरकार ने उन्हें भारतीय शिविर से दूर रहने और जार्जियाई पहलवानों के साथ अभ्यास के लिए नहीं भेजा था।”

डब्ल्यूएफआई ने आगे कहा, “मैं सुशील और नरसिंह दोनों को पसंद करता हूं लेकिन जब नरसिंह ने अपनी काबिलियत के दम पर ओलम्पिक सीट हासिल किया है तो फिर हम उनके साथ नाइंसाफी कैसे कर सकते हैं। रियो जाने वाले सभी एथलीटों के नाम तीन मई को ही भेजा जा चुके हैं।”

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर गौर किया कि राष्ट्रीय खेल नीति के अनुसार ट्रायल जरूर नहीं हैं और केंद्र सरकार बार-बार यही कहता आ रहा है।

अदालत ने कहा, “सुशील आप कहते आ रहे हैं कि ट्रायल कराया जाए क्योंकि यह राष्ट्रीय खेल नीति के अनुसार अनिवार्य है। मैं नहीं देख रहा कि इस नीति में इस तरह की किसी अनिवार्यता का जिक्र है। केंद्र सरकार ने कहा है कि उसने इस सम्बंध में महासंघ को फैसले का हक दे रखा है। “

सुशील की वकालत कर रहे वरिष्ठ वकील अमित सिब्बल ने कहा कि ट्रायल ओलम्पिक से पहले एथलीट के मौजूदा फार्म को परखने के लिए जरूरी हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि वह इस मामले में गलत शपथ पत्र दाखिल करने को लेकर डब्ल्यूएफआई के उपाध्यक्ष राज सिंह के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकती है।

सुशील इससे पहले भारत के लिए दो मौकों पर ओलम्पिक पदक जीत चुके हैं। बीजिंग में सुशील ने कांस्य जीता था और फिर लंदन में रजत पदक जीता लेकिन दोनों पदक उन्होंने 66 किलोग्राम वर्ग में जीते थे, जिसे अंतर्राष्ट्रीय ओलम्पिक संघ ने 2014 में भंग कर दिया था। इसके बाद सुशील ने 74 किलोग्राम का रुख किया, जिसमें नरसिंह भारत के नम्बर-1 पहलवान हैं।

चोट के कारण सुशील रियो ओलम्पिक के लिए क्वालीफाईंग टूर्नामेंट में नहीं खेल सके और इसी दौरान नरसिंह ने ओलम्पिक टिकट हासिल किया। अब सुशील चाहते हैं कि उनका नरसिंह के साथ मुकाबला हो और जो जीते, वही रियो जाए लेकिन महासंघ और खेल मंत्रालय इसके लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं। इसी को लेकर सुशील ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।