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यूं ही नहीं कोई सचिन बन जाता है... सिद्धू ने मास्टर ब्लास्टर के उदाहरण से भारतीय बल्लेबाजों को दी सीख

सचिन तेंदुलकर का उदाहरण देकर नवजोत सिंह सिद्धू ने भारत के मौजूदा बल्लेबाजों को स्पिन के खिलाफ संघर्ष पर सीख दी.

user-circle cricketcountry.com Written by Bharat Malhotra
Last Updated on - December 11, 2025 9:30 AM IST

नई दिल्ली: भारतीय बल्लेबाज बीते कुछ वक्त से स्पिनर्स के खिलाफ संघर्ष करते दिख रहे हैं. और साउथ अफ्रीका के खिलाफ हाल ही में घर पर खेली गई सीरीज में भी भारत को जिस तरह से हार का सामना करना पड़ा उससे एक बार फिर यह सवाल उठा कि आखिर फिरकी गेंदबाजों के सामने इस तरह से लाचार होने की वजह क्या है. भारत, जो स्पिनर्स के खिलाफ इतना अच्छा खेलता था, आखिर अब क्यों इस स्थिति में पहुंच गया है.

साउथ अफ्रीका के स्पिनर्स ने भारतीयों के खिलाफ बहुत अच्छा प्रदर्शन किया. उसके ऑफ स्पिनर साइमन हार्मर ने 8.94 के औसत से 17 विकेट हासिल किए.

सिद्धू ने दिया सचिन तेंदुलकर का उदाहरण

इस मुद्दे पर भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज नवजोत सिद्धू ने सचिन तेंदुलकर का उदाहरण दिया है कि कैसे इस माहन बल्लेबाज ने एक बार इसी तरह आउट होन के बाद स्पिन खेलना शुरू कर दिया था.

स्पोर्ट्स्टार से बातचीत में सिद्धू ने कहा, ‘एक टेस्ट मैच में सनथ जयसूर्या ने सचिन को फंसा लिया था. मैं नॉन-स्ट्राइकर छोर पर था. जयसूर्या लेग स्टंप के बाहर गेंदबाजी करता रहा. तेंदुलकर परेशान हो गए और उन्होंने पुल करने की कोशिश की. और आउट हो गए. क्योंकि उन्हें स्वीप करना नहीं आता था.’

सिद्धू ने आगे बताया, ‘वह मैच के बाद ड्रेसिंग रूम में बैठे थे. सभी चले गए. लेकिन वह वहां अकेला बैठा रहा. अजित वाडेकर सर, जो उस वक्त टीम के मैनेजर थे, ने सचिन को भी बस में चलने के लिए कहा. मैं उसके पास गया तो उसने कहा, ‘ऐसा नहीं चलेगा.’ मैंने कहा, ‘क्या हो गया एक आउट ही हुआ, कोई चक्कर नहीं है. वह नैगेटिव गेंदबाजी कर रहा था.”

सचिन का जुनून का था बेमिसाल, डाइनिंग टेबल पर भी प्रैक्टिस

सिद्धू के शब्दों का हालांकि सचिन तेंदुलकर की प्रतिबद्धता पर कोई असर नहीं हुआ.

उस घटना को याद करते हुए सिद्धू कहते हैं, ‘उसने चंडीगढ़ से 10 स्पिनर्स बुलाए, सभी बाएं हाथ के स्पिनर. वह सात बजे सुबह मैदान पर पहुंच गया. और वह सिर्फ स्वीप, स्वीप, स्वीप कर रहा था. मैंने पहले कभी उन्हें स्वीप करते हुए नहीं देखा था.’

इतना ही नहीं यह बात उनके जेहन में बहुत गहरी घुस गई थी. उनकी रोजमर्रा की जिंदगी की आदत बन गई थी. सिद्धू ने कहा, ‘डिनर के दौरान की एक घटना है. मैं वहां था. संजय (मांजरेकर) और (अजय) जडेजा वहां थे. और सचिन अपने फोक्र से स्वीप शॉट की प्रैक्टिस कर रहे थे.’

सिद्धू ने कहा कि आइडिया को जीना होता है…

सिद्धू ने मौजूदा पीढ़ी के भारतीय बल्लेबाजों को सचिन तेंदुलकर का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा, ‘यह एक आइडिया को जीना होता है. उसे ही सांस बना लेना होता है, उसके साथ सोना-उठना होता है. यह प्रतिबद्धता है. क्रिकेट सचिन तेंदुलकर की जिंदगी था. इस तरह आउट होना उनके आत्म-सम्मान के लिए ठेस था. और जब आत्म-सम्मान को ठेस लगती है तो दर्द होता है.’

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उन्होंने आगे कहा, ‘भारत का घर पर हारना भी दर्द देना चाहिए. लेकिन, बात सिर्फ इतनी नहीं है कि आप वहां पहुंचना चाहते हैं जहां आप थे. यह वहां पहुंचने के मायने तलाश करने की बात है. अगर आप उन मायनों और रास्तों का ध्यान रखेंगे तो लक्ष्य अपना ध्यान खुद रख लेगा. और मैंने उसके मायनों और रास्तों के बारे में ही बात की है.’