'यो-यो' टेस्ट के नाम पर सेलेक्टर्स ने बोला झूठ? अमित मिश्रा का चौंकाने वाला खुलासा

अमित मिश्रा ने कहा कि यो-यो टेस्ट की खबरें झूठीं

Edited By : Manoj Shukla |Oct 08, 2017, 05:50 PM IST

Published On Oct 08, 2017, 05:50 PM IST

Last UpdatedOct 08, 2017, 05:50 PM IST

भारतीय टीम © AFP
भारतीय टीम © AFP

भारतीय टीम के स्पिन गेंदबाज अमित मिश्रा ने बड़ा खुलासा किया है। अमित के इस खुलासे के बाद सेलेक्टर्स पर सवाल खड़े होने लगे हैं। अमित ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि उन्होंने कभी ‘यो-यो’ टेस्ट दिया ही नहीं। अमित ने कहा, ”मैं उन खबरों को देखकर हैरान था जिसमें कहा जा रहा था कि अमित मिश्रा यो-यो टेस्ट में फेल हो गए। सच ये है कि मैं कभी इस टेस्ट में शामिल ही नहीं हुआ।” भारत की तरफ से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले तेज गेंदबाज बने जसप्रीत बुमराह

अमित ने आगे कहा, ”अगर मैंने टेस्ट दिया ही नहीं तो मैं फेल कैसे हो सकता हूं। मैं पहले से ही बेंगलुरू में था और रोज की ही तरह अपनी ट्रेनिंग कर रहा था। हालांकि इस दौरान कई खिलाड़ी यो-यो टेस्ट देने के लिए तैयार दिख रहे थे लेकिन मैं इससे काफी दूर था। मुझे नहीं पता कि ये खबर कैसे फैली।” अमित ने ये भी कहा कि मामले पर उन्होंने एनसीए के ट्रेनर आशीष कौशिक से भी बातचीत की। कौशिक ने कहा अमित से कहा कि उन्होंने सेलेक्टर्स से बात कर ली है और उनका यो-यो टेस्ट लिया जाएगा।

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अमित ने आगे कहा कि इसके बाद मैं यो-यो टेस्ट की तैयारी करने लगा और अपनी बारी का इंतजार करने लगा हालांकि ऐसा हुआ नहीं। अमित ने ये भी कहा कि उन्हें भारतीय टीम से खराब फॉर्म के कारण बाहर नहीं किया गया था बल्कि वो चोटिल हो गए थे और इसी कारण उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा। अगर अमित का ये दावा सही होता है तो सेलेक्टर्स को मामले पर सफाई भी देनी पड़ सकती है। दावा ये भी किया जा रहा था कि सुरेश रैना, युवराज सिंह जैसे खिलाड़ियों को भी यो-यो टेस्ट में फेल होने के कारण ही टीम में शामिल नहीं किया गया। ये भी पढ़ें: ’सबसे बड़ा रिकॉर्ड’ बनाने से सिर्फ तीन कदम दूर टीम इंडिया

क्या है ‘यो-यो’ टेस्ट: इस टेस्ट में कई ‘कोन’ की मदद से 20 मीटर की दूरी पर दो लाइन बनाई जाती हैं। एक खिलाड़ी लाइन के पीछे अपना पैर रखकर शुरुआत करता है और जैसे ही उसे दौड़ने के लिए कहा जाता है वो दौड़ लगा देता है। खिलाड़ी लगातार दो लाइनों के बीच दौड़ता है और जब बीप बजता है तो उसने मुड़ना होता है।

हर एक मिनट के बाद तेजी बढ़ती जाती है। अगर समय पर लाइन तक नहीं पहुंचे तो दो और ‘बीप’ के बाद तेजी पकड़नी पड़ती है। अगर खिलाड़ी दो छोरों पर तेजी हासिल नहीं कर पाता है तो टेस्ट रोक दिया जाता है। ये पूरी प्रक्रिया सॉफ्टवेयर पर आधारित होती है जिसमें नतीजे रिकॉर्ड किए जाते हैं।

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