विदर्भ क्रिकेट के चमकते सितारे और घरेलू क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक वसीम जाफर (Wasim Jaffer) ने शनिवार को अंतरराष्ट्रीय से संन्यास का ऐलान किया। रणजी ट्रॉफी में सर्वाधिक रन बनाने वाले जाफर ने विदर्भ को लगातार दो खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई थी।

जाफर के संन्यास पर विदर्भ टीम के कोच चंद्रकांत पंडित (Chandrakant Pandit) ने आईएएनएस से कहा, “एक इंसान के तौर पर वो बेहद शांत और धैर्यवान हैं। क्रिकेट के सिवाए उसे किसी और चीज में दिलचस्पी नहीं थी। क्रिकेट के लिए वो बेहद जुनूनी हैं। वो एक महान खिलाड़ी हैं। जितना अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट उसे खेलना चाहिए था दुर्भाग्यवश वो उतना नहीं खेल सका, लेकिन वो भारत के सर्वश्रेष्ठ सलामी बल्लेबाजों में से एक है।”

पंडित ने कहा, “वो बेहद मददगार इंसान हैं। वो ज्यादा बात नहीं करते और खेल पर ध्यान देते हैं। उनकी खेल को लेकर प्रतिबद्धता बहुत ऊंचे स्तर की है। उन्होंने हर जगह काफी योगदान दिया। वह सिर्फ अपने आप पर ही नहीं, दूसरों की भी काफी मदद करते थे। उनकी जो प्रतिबद्धता है जो जुनूनी है वो युवाओं के सीखने लायक है।”

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उन्होंने कहा, “जाफर की निरंतरता उनकी खासियत थी। वो सिर्फ रन नहीं बनाते थे बल्कि लंबी पारियां खेलते थे। लगातार रन करते थे। वो 100 रन पर संतुष्ट नहीं होते थे। वो बड़ी पारी खेलते थे। उनकी दूसरी खासियत ये थी कि उनके मुंह से मैंने कभी सैटिशफैक्शन शब्द सुना नहीं। वो कभी नहीं कहते थे कि आज मैंने अच्छा किया। वो हमेशा कहते थे कि आज जो मैंने किया मैं इससे भी बेहतर करूंगा।”

विदर्भ टीम के ड्रेसिंग रूम में जाफर की अहमियत

विदर्भ की सफलता में जाफर का योगदान बताते हुए पंडित ने कहा, “एक सिंपल ही चीज थी। मेरे और युवाओं के बीच में जाफर एक ब्रिज था। कई युवा सीधे मेरे पास आने को लेकर सोचते होंगे कि जाएं या नहीं। उनके लिए जाफर एक ऐसा इंसान था जिससे वो अपनी बातें आराम से शेयर करते थे। जाफर से मुझे ये मदद मिली की उसने मुझे हर खिलाड़ी के बारे में जानकारी समय पर दी। इससे मुझे चीजें संभालने में आसानी हो गई। टीम के ड्रेसिंग रूम का माहौल उसने बेहतरीन तरीक से बनाए रखा था। हम दोनों का जो रेपो था वो मैंने अभी तक अपने करियर में नहीं देखा। उसने सिर्फ ड्रेसिंग रूम में नहीं मैदान के अंदर भी टीम की काफी मदद की। सभी खिलाड़ी उसका सम्मान करते थे।”

पंडित ने कहा, “निश्चित तौर पर टीम को उनकी कमी खेलेगी। सिर्फ उनका मोटिवेशन नहीं, उनकी मौजूदगी नहीं, लेकिन उनका खुद का योगदान भी काफी बड़ा था। मैदान पर उनकी सलाह, फैज फजल को मदद करना, ये सब जाफर ने किया है। उनका योगदान मैं कहूंगा कि बहुत बड़ा था। वो चीज अब टीम को खलेगी क्योंकि इतना बड़ा खिलाड़ी टीम में रहता है तो सामने वाली टीम भी सोचती है। उसकी वो रेपोटेशन बनाया था।”

संन्यास के बाद कोच बन सकते हैं जाफर

उन्होंने कहा, “वो कोचिग में निश्चित तौर पर सफल रहेंगे। उनके पास अच्छा-खासा अनुभव है। उन्होंने हर स्थिति देखी है। हर खिलाड़ी को देखा, उसके साथ खेले हैं। उनको पता है कि किस खिलाड़ी को किस तरह से हैंडल करना चाहिए। मेरे साथ भी उनकी अच्छी बातचीत रही है, काफी सारी चीजों पर हम आपस में बात करते थे। इससे भी उन्हें फायदा होगा। हालांकि यह स्किल्स अलग हैं, लेकिन जाफर इस चीज को जल्दी से जल्दी हासिल कर लेगा।”