भारतीय क्रिकेट टीम के लिए आज का दिन (13 अप्रैल) बेहद खास है. सुनील गावस्कर की कप्तापनी में टीम इंडिया ने करीब 36 साल पहले अपने चिर-प्रतिदंद्वी पाकिस्तान को हराकर पहली बार आयोजित एशिया कप खिताब अपने नाम किया था. 1983 में भारत को वर्ल्ड चैंपियन बनाने वाले कपिल देव चोट के कारण इस टूर्नामेंट में नहीं खेल रहे थे.

एशिया कप का आयोजन पहली बार 1984 में हुआ था. शारजाह में 6-13 अप्रैल तक आयोजित इस टूर्नामेंट में भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका सहित एशिया की तीन टीमों ने हिस्सा लिया था. शारजाह क्रिकेट एसोसिएशन ने पहली बार किसी वनडे इंटरनेशनल मैच की मेजबानी की थी.

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ये टूर्नामेंट राउंड रॉबिन फॉर्मेट में खेला गया था, जिसमें सभी को एक-दूसरे से एक-एक मैच खेलना था. सीरीज में कुल 3 मैच ही खेले गए थे. भारतीय टीम प्वाइंट्स टेबल में टॉप पर होने की वजह से खिताब अपने नाम किया था, भारत ने अपने दोनों मुकाबले जीते थे.

एशिया कप का पहला मैच श्रीलंका और पाकिस्तान के बीच खेला गया, जिसे श्रीलंका ने 5 विकेट से अपने नाम किया था. दूसरे मुकाबले में भारत ने श्रीलंका को 10 विकेट से रौंद दिया था. श्रीलंका की ओर से रखे गए 97 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने विकेटकीपर बल्लेबाज सुरिंदर खन्ना (51*) की अर्धशतकीय पारी के दम पर 21.4 ओवर में बिना कोई विकेट गंवाए जीत दर्ज कर ली.

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भारत ने अंतिम मैच में पाकिस्तान को 54 रन से हराकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया. टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सुरिंदर खन्ना (56) की अर्धशतकीय पारी के दम पर 46 ओवर में 4 विकेट पर 188 रन बनाए. जवाब में पाकिस्तान की टीम 39.4 ओवर में 134 रन पर ढेर हो गई. उसकी ओर से मोहसिन खान ने सबसे अधिक 35 रन बनाए जबकि भारत की ओर से रोजर बिन्नी ने सर्वाधिक 3 विकेट लिए.

7 बार का चैंपियन है भारत

भारतीय टीम सर्वाधिक 7 बार एशिया कप टूर्नामेंट जीत चुकी है. भारत में 2018 में बांग्लादेश को हराकर सातवीं बार इस ट्रॉफी पर कब्जा किया था. दुबई में खेले गए फाइनल मैच में भारत ने बांग्लादेश को 3 विकेट से पराजित किया था. भारत की ओर से कप्तान रोहित शर्मा ने सर्वाधिक 48 रन बनाए थे.