टी20 क्रिकेट के जमाने में फैंस अक्सर 40 या 50 गेंदों पर शतक बनते हुए देखते हैं। क्रिस गेल , डेविड मिलर और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ियों ने टी20 फॉर्मेट में ऐसी कई शानदार शतकीय पारियां खेली हैं लेकिन क्या आप इस बात पर यकीन करेंगे कि आज से 34 साल पहले टेस्ट क्रिकेट में 56 गेंदो पर शतक जड़ा गया था।

जी हां, 15 अप्रैल 1984 को इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच के चौथे दिन महान बल्लेबाज विवियन रिचर्ड्स ने 56 गेंदो पर 100 रन बनाकर, तब टेस्ट क्रिकेट का सबसे तेज शतक बनाया था। सबसे तेज टेस्ट शतक बनाने का रिकॉर्ड अगले 30 सालों तक रिचर्ड्स के नाम रहा था, जिसे साल 2016 में न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान ब्रैंडन मैक्कुलम ने क्राइस्टचर्च टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 54 गेंदो पर शतक बनाकर तोड़ा।

साल 1986 में 11 से 16 अप्रैल के बीच इंग्लैंड के वेस्टइंडीज दौरे पर खेले गए आखिरी टेस्ट मैच में सर विव रिचर्ड्स ने टेस्ट इतिहास की एक सर्वश्रेष्ठ पारी खेली थी। इयान बॉथम और ग्राहम गूच वाले इंग्लिश अटैक के खिलाफ खेलते हुए रिचर्ड्स ने वेस्टइंडीज की दूसरी पारी में 189.65 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए 58 गेंदो पर 110 रन की नाबाद पारी खेली थी। पारी के दौरान विंडीज कप्तान ने सात चौके और सात छक्के जड़े थे।

गौरतलब है कि एंटीगा के सैंट जॉन्स स्टेडियम में खेले गए इस टेस्ट मैच की पहली पारी में रिचर्ड्स मात्र 26 रन बनाकर बॉथम के शिकार बने थे। हालांकि डेसमंड हेन्स के शानदार शतकीय पारी के दम पर मेजबान टीम ने 474 रन का स्कोर बनाया था। जिसके बाद जोएल गार्नर और मैल्कम मॉर्शल ने मिलकर इंग्लिश बल्लेबाजी क्रम को 310 रन पर समेट दिया।

164 रन की बढ़त के साथ बल्लेबाजी करने उतरी विंडीज टीम को हेन्स ने एक बार फिर बेहतरीन शुरुआत दिलाई। इस विंडीज सलामी बल्लेबाज ने रिची रिचर्डसन के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए 100 रन की साझेदारी बनाई और अर्धशतकीय पारी खेली। हेन्स के 168 गेंदो पर 70 रन बनाकर आउट होने के बाद क्रीज पर आए रिचर्ड्स ने परंपरागत टेस्ट क्रिकेट से हटकर अलग ही अंदाज में बल्लेबाजी की।

जब टेस्ट मैच में बाउंड्री पर लगे थे सात फील्डर

रिचर्ड्स ने मात्र 81 मिनटों में अपने टेस्ट करियर का 20वां शतक लगाया। गौरतलब है कि इस पारी के दौरान शायद टेस्ट क्रिकेट में ऐसा पहली बार हुआ था कि सात फील्डर्स बाउंड्री पर लगे थे। आमतौर पर टेस्ट क्रिकेट में ऐसा नहीं होता लेकिन ना ही ये कोई आम मैच था और ना ही रिचर्ड्स की ये पारी साधारण।

रिचर्ड्स की ये पारी उस आक्रामकता को पूरी तरह दर्शाती है, जिसके लिए विंडीज बल्लेबाजों को हमेशा से ही जाना जाता है। गैरी सोबर्स, क्लाइव लॉयड से लेकर रिचर्ड्स के बाद खेलने वाले ब्रायन लारा और फिर क्रिस गेल ने कैरेबियाई बल्लेबाजों की इस विस्फोटक बल्लेबाजी शैली को आज तक जिंदा रखा है।