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जब युवराज सिंह ने खेली करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी, कहा- 'भले ही मैं मर जाऊं, भारत विश्व कप जीतेगा'

पूर्व भारतीय स्टार बल्लेबाज युवराज सिंह विश्व कप 2011 के प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट थे।

Edited By : India.com Staff |Mar 20, 2020, 02:29 PM IST

Published On Mar 20, 2020, 02:29 PM IST

Last UpdatedMar 20, 2020, 02:29 PM IST

1983 के बाद पहली बार भारतीय टीम को वनडे विश्व कप जिताने का कारनामा करने वाली महेंद्र सिंह धोनी की टीम इंडिया के सबसे अहम खिलाड़ी थे- युवराज सिंह। 2011 विश्व कप में मैन ऑफ टूर्नामेंट रहे युवराज सिंह ने कई शानदार पारियां खेली थी लेकिन उनके बल्ले से सबसे बेहतरीन पारी 20 मार्च 2011 को वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए मैच में आई।

चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले गए इस मैच में युवराज ने विश्व कप का अपना पहला शतक लगाया और एक छोर से लगातार विकेट गिरने के बावजूद भारत को 268 के स्कोर तक पहुंचाया। जिसकी मदद से टीम इंडिया ने 80 रन से शानदार जीत हासिल की।

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मैन ऑफ द मैच रहे युवराज ने 123 गेंदो पर 10 चौकों और 2 छक्कों की मदद से 113 रन की पारी खेली। चेन्नई की गर्मी में लगभग 35 ओवर तक बल्लेबाजी करने के बाद भी युवराज रुके नहीं और गेंदबाजी करने आए। उन्होंने 4 ओवर में 18 रन देकर दो विकेट भी झटके।

ये पारी इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि युवराज इस विश्व कप टूर्नामेंट के दौरान बीमार थे। मैच के दौरान वो पिच पर उल्टियां कर रहे थे लेकिन वो नहीं रुके। हालांकि उनकी हालत कितनी गंभीर है ये किसी को भी पता नहीं था। टूर्नामेंट खत्म होने के बाद युवराज को पता चला कि उन्हें कैंसर है, जबकि मैच खेलने के दौरान युवराज को भी इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था।

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विश्व कप जीतने के तीन साल बाद 2014 में आजतक को दिए एक इंटरव्यू में युवराज ने कहा था कि, “मेरा सबसे पहला ख्याल ये था कि ये चेन्नई की गर्मी की वजह से हो रहा है। मैं हमेशा से विश्व कप शतक लगाना चाहता है, जो कि कभी हो नहीं पाया क्योंकि मैं 6 नंबर पर खेलता था। मैंने भगवान से प्रार्थना की, कि भले ही मैं बाद में मर जाऊं, भारत को विश्व कप जिता दें।”

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके युवराज का नाम भारतीय क्रिकेट के इतिहास में विश्व कप नायक के रूप में दर्ज किया जाएगा।

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