Bharat Malhotra
Bharat Malhotra अभी cricketcountry.com की हिंदी टीम का हिस्सा हैं. भारत के पास डिजिटल मीडिया में करीब 17 साल का अनुभव है. साल 2008 में आ ...Read More
Written by Bharat Malhotra
Last Updated on - March 23, 2026 4:26 PM IST

कराची: पाकिस्तान सुपर लीग का 11वां सीजन मुश्किल में है. विदेशी खिलाड़ियों ने कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किए लेकिन इसके बाद भी कइयों ने PSL के बजाए IPL को चुनने का फैसला किया. कई खिलाड़ी कॉन्ट्रैक्ट तोड़कर आईपीएल में खेलने को राजी हो गए हैं.
पाकिस्तान सुपर लीग मे इस साल दो नई टीमें भी शामिल हो रही हैं. लेकिन कॉन्ट्रैक्ट और लॉजिटिस्क लीग के लिए बड़ी परेशानी बन गया है.
विदेशी खिलाड़ियों का ध्यान पीएसल के बजाय इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) पर है. यहां करार मिलने पर वह पीएसएल छोड़ने लगे हैं. और इससे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड खिसिया गया है. अभी तक करीब 8-10 खिलाड़ी पाकिस्तान सुपर लीग को छोड़कर आईपीएल का दामन थाम चुके हैं. और इससे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन नकवी भी बहुत खफा हैं.
दो नई फ्रेंचाइजी को शामिल करने के साथ पीएसएल 26 मार्च, गुरुवार से शुरू हो रही है. और इसके दो दिन बाद यानी 28 मार्च से आईपीएल का 19वां सीजन शुरू होगा. यानी करीब-करीब एक साथ शुरू होने वाली ये दोनों लीग आपस में टकराएंगी. पीएसएल का फाइनल 3 मई को है. वहीं आईपीएल का फाइनल 31 मई को हो सकता है.
समाचार एजेंसी भाषा ने अपने सू्त्र के हवाले से बताया कि प्लेयर्स के कॉन्ट्रैक्ट तोड़ने के बाद पीसीबी के लिए परेशानी बढ़ गई है. ऊपर से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जो हालात पैदा हुए हैं उसने कुछ खिलाड़ियों ने आखिरी वक्त पर फीस बढ़ाने की मांग की है. इससे पीसीबी की दिक्कतों में इजाफा हुआ है.
सूत्र ने बताया, ‘इस वक्त पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का पूरा ध्यान पीएसएल को तय समय पर आयोजित करने पर है. और इस वक्त तक उनसे नाम वापस लेने वाले विदेशी खिलाड़ियों पर कोई ऐक्शन नहीं लिया है.’
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खबर यह है कि पीसीबी की बैठक में कॉन्ट्रैक्ट तोड़ने वाले विदेशी क्रिकेटरों पर दो से चार साल का बैन लगाया जा सकता है. इसे लेकर चर्चा हुई है. लेकिन पाकिस्तान के लिए परेशानी यह है कि अगर वह ऐसा करते हैं तो विदेशी खिलाड़ी पीसीएल फ्रैंचाइजी के साथ कॉन्ट्रैक्ट करने से और पीछे हट सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘ऐसे में एक तर्क यह भी है कि बैन से पीएसएल के आने वाले सीजन के लिए बड़े विदेशी खिलाड़ियों से करार करना और भी मुश्किल हो जाएगा.’
अब आईपीएल के सामने पीएसएल कहीं नहीं टिकता है. और सूत्र ने भी माना यह बड़ी चुनौती है. खास तौर पर वित्तीय असमानता बड़ी चिंता का विषय है. सूत्र ने माना कि कई खिलाड़ी चोट से जूझ रहे आईपीएल में बहुत ज्यादा सैलरी पैकेज दिए जा रहे हैं, जबकि पीएसएल फ्रेंचाइजी उन वेतन पैकेजों का मुकाबला करने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
पीसीबी ने पिछले साल अनुबंध उल्लंघन के लिए साउथ अफ्रीका के कॉर्बिन बॉश के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की थी और उन पर एक साल का प्रतिबंध लगाया था. यह इस कदम का कोई असर नहीं हुआ क्योंकि बॉश ने पीएसएल खिलाड़ी ड्राफ्ट में शामिल होने से पहले ही अगली नीलामी में आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर लिया.
पीसीबी द्वारा इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के अन्य सदस्यों के सामने भी उठा सकता है. जिससे एक मजबूत ढांचा तैयार किया जा सके, जो यह पक्का करे कि खिलाड़ी किसी लीग में शामिल होने के बाद अपने कॉन्ट्रैक्ट की जिम्मेदारियों को निभाए.
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इस साल के पीएसएल से कॉन्ट्रैक्ट साइन करने के बाद नाम वापस लेने वाले विदेशी खिलाड़ियों में वेस्टइंडीज के गुडाकेश मोती और जॉनसन चार्ल्स, श्रीलंका के दासुन शनाका, जिम्बाब्वे के ब्लेसिंग मुजरबानी, ऑस्ट्रेलिया के स्पेंसर जॉनसन और जेक फ्रेजर-मैकगर्क, दक्षिण अफ्रीका के ओटनेल बार्टमैन, अफगानिस्तान के रहमानुल्लाह गुरबाज और इंग्लैंड के टायमल मिल्स शामिल हैं.
पीसीबी ने रविवार को घोषणा की कि क्षेत्र में चल रहे संघर्ष और सरकार द्वारा खर्च कम करने के उपायों के कारण पीएसएल मैच दर्शकों के बिना आयोजित किए जाएंगे. बोर्ड ने उद्घाटन समारोह भी रद्द कर दिया और आयोजन को केवल दो स्थानों (लाहौर और कराची) तक सीमित कर दिया.
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