पाकिस्तान में श्रीलंकाई टीम पर आतंकवादी हमला हुआ था उसके बाद से वहां कोई इंटरनेशनल मैच नहीं हुआ © AFP
पाकिस्तान में श्रीलंकाई टीम पर आतंकवादी हमला हुआ था उसके बाद से वहां कोई इंटरनेशनल मैच नहीं हुआ © AFP

फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल क्रिकेटर्स एसोसिएशन(एफआईसीए) के मुखिया टोनी आयरिश ने पाकिस्तान में विदेशी खिलाड़ियों की सुरक्षा के खतरे को पहले से अधिक बताया है। समाचार एजेंसी सीएमसी के मुताबिक, टोनी का यह बयान पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड (डब्ल्यूआईसीबी) को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में दो टी-20 मैच खेलने के लिए दिए गए प्रस्ताव के बाद आया है। टोनी ने सोमवार को विजडन इंडिया से कहा, “पाकिस्तानी खिलाड़ियों की कोई संघ नहीं है और इसलिए वह एफआईसीए से नहीं जुड़ें हैं।”

उन्होंने कहा, “पूरे विश्व के खिलाड़ी एफआईसीए से जुड़े हैं और समय-समय पर सुरक्षा संबंधी जानकारी मांगते रहते हैं।” उन्होंने कहा, “हम हमारी स्वतंत्र सुरक्षा एजेंसी से इस संबंध में रिपोर्ट लेते हैं। अतीत में हमें जो लगातार सलाह मिली है उसके मुताबिक पाकिस्तान में खिलाड़ियों को भेजना जोखिम भरा काम है।” पाकिस्तान में श्रीलंका टीम पर हुए आतंकवादी हमले के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मैच पिछले सात साल से पाकिस्तान में आयोजित नहीं हुए हैं।

दो साल पहले जिम्बाब्वे की टीम पाकिस्तान के दौरे पर सीमित ओवरों की श्रृंखला खेलने गई थी, लेकिन फाइनल मैच के दौरान गद्दाफी स्टेडियम में आत्मघाती हमला होने के कारण इस श्रृंखला पर भी दाग लग गया था। पीसीबी दूसरी तरफ अपने देश में अंतर्राष्ट्रीय मैचों के आयोजन के लिए बेसब्र है। इसी कारण उसने डब्ल्यूआईसीबी को प्रस्ताव भेजा है। डब्ल्यूआईसीबी का सुरक्षा दल इस महीने के आखिर में पाकिस्तान का दौरा कर सकता है।