पार्थिव पटेल  © AFP
पार्थिव पटेल © AFP

पार्थिव पटेल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लगभग 8 साल बाद वापसी की। वापसी के बाद पार्थिव ये बखूबी जानते थे कि अगर रिद्धिमान साहा फिट होते हैं तो टीम में उनसे पहले रिद्धिमान साहा को प्रथमिकता दी जाएगी। इसके बावजूद पार्थिव ने इंग्लैंड के खिलाफ तीन टेस्ट मैच खेले और बतौर सलामी बल्लेबाज उन्होंने शानदार खेल दिखाया। पार्थिव ने मोहाली में 67 और चेन्नई में 71 रनों की पारी खेली। 8 साल बाद टीम में वापसी पर पार्थिव पटेल ने कहा कि मुझे विश्वास था कि मैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी जरूर करूंगा।

पार्थिव ने कहा कि मैं अपनी क्रिकेट का लुत्फ उठा रहा था और इंडियन प्रीमियर लीग में काफी अच्छा कर रहा था और उससे भी ज्यादा मैं अंतरराष्ट्रीय गेंदबाजों का सामना कर रहा था, जो काफी जरूरी था अपने आप को अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाए रखने के लिए। इससे मेरे अंदर लगातार निखार आता रहा। पार्थिव ने इस दौरान कहा कि टीम में ना होने से मैं परेशान जरूर था। लेकिन मुझे चयन को लेकर कोई चिंता नहीं थी। मुझे लगता है कि बतौर खिलाड़ी आपको ये पता होना चाहिए कि आप इस समय कहां खड़े हो और आपके लिए इसके आगे का सही कदम कौन सा होगा। अगर वो इस बात को समझ लेगा तो वह अच्छा कर सकता है और बिल्कुल यही मैंने भी किया। जिसका मुझे फायदा भी मिला। ये भी पढ़ें: 2016 में टीम में वापसी करने वाले खिलाड़ी

पार्थिव पटेल ने कहा कि हर दिन मेरे लिए एक मौका था जिसका मैं काफी लंबे समय से इंतजार कर रहा था। मैं अपने देश के लिए दोबारा खेलना चाहता था। जब आप इतने दबाव में खेलते हैं तो आपको दूसरी चिंताओं के बारे में ख्याल ही नहीं रहता और आप सिर्फ अपना सर्वोच्च देने की कोशिश करते हैं जो मैंने किया। रिद्धिमान साहा से विकेटकीपिंग की तुलना पर पार्थिव ने कहा कि मैं तुलना में विश्वास नहीं रखता। मैंने इससे पहले भी कहा है और फिर से कहता हूं, आप मुझे दुनिया का कोई भी विकेटकीपर बता दो जिसने एक भी कैच ना छोड़े हों। कोई भी बेयरस्टो, बेन स्टोक्स के कैच की बात नहीं कर रहा और न ही एलिस्टेयर कुक की स्टंपिंग की बात कर रहा है। लेकिन अब मैं पहले से ज्यादा अनुभवी और आत्मविश्वास से भरा हूं। ये भी पढ़ें: मेरे अंदर अभी काफी क्रिकेट बाकी है: युवराज सिंह

विकेटकीपिंग के सवाल पर पार्थिव ने कहा कि जब मुझे टीम से बाहर किया गया था तो विकेट के पीछे मेरी मूवमेंट अच्छी नहीं थी और मैं सही से हिल भी नहीं पाता था, हो सकता है तब मैं 90 ओवर विकेटकीपिंग करने के लिए शत-प्रतिशत फिट ना रहा हूं। लेकिन मुझे अब ये किसी को बताने की जरूरत नहीं है कि मैं पूरी तरह से फिट हूं और ये मेरे खेल में भी दिखता है। मैंने कम से कम 160 ओवरों की विकेटकीपिंग की और उसके बाद मैं ओपनिंग करने भी आया और इन सब बातों से आप काफी अच्छा महसूस करते हैं। मेरे लिए तीनों टेस्ट मैच अच्छे रहे और भारतीय पिचों पर लगातार खेलते रहना मेरे लिए काफी अच्छा रहा जिसकी बदौलत मैंने इंग्लैंड के खिलाफ खुद को आसानी से ढाल लिया। आपको बता दें कि पार्थिव पटेल ने इंग्लैंड के खिलाफ अच्छी बल्लेबाजी की थी।