Parvez Rasool: Mismanagement, unprofessionalism has always hindered progress of cricket in Jammu & Kashmir
परवेज रसूल ने 2017 में इंग्लैंड के खिलाफ कानपुर में टी20 अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू किया था।

साल 2017 में इंग्लैंड टीम के भारत दौरे पर कानपुर में ग्रीनपार्क स्टेडियम में खेले गए टी20 मैच के दौरान परवेज रसूल ने टी20 अंतर्राष्ट्रीय में डेब्यू किया था। कम ही लोगों को याद था कि रसूल 2014 में बांग्लादेश के खिलाफ वनडे मैच में टीम इंडिया के लिए डेब्यू कर चुके थे। हालांकि उसके बाद जम्मू कश्मीर से कोई और खिलाड़ी भारतीय टीम में नहीं आया। जम्मू कश्मीर टीम के कप्तान परवेज ने खुद ही इस सवाल का जवाब दिया।

क्रिकस्टेसी वेबसाइट के एक्सक्लूसिव बातचीत में परवेज ने कहा, “बड़े हो रहे बच्चों के लिए यहां सुविधाएं अच्छी नहीं थी। यहां तक कि त्रिपुरा में भी यहां से अच्छे ग्राउंड थे। पूरे जिले में खेलने के लिए केवल एक ही मैदान था। यहां कम से कम बेसिक सुविधाएं होनी चाहिए थी। दूसरे राज्यों में जो सुविधाएं है, यहां अगर उसका 50 प्रतिशत भी होता तो हमारा लक्ष्य पूरा हो जाता।”

परवेज ने बताया कि जम्मू कश्मीर में क्रिकेट को आगे बढ़ने से रोकने में खराब मैनेजमेंट का हाथ है। उन्होंने कहा, “सच कहूं तो कश्मीर घाटी की राजनीतिक समस्याएं कभी भी क्रिकेट के विकास के आड़े नहीं आईं। अगर आप गौर करें तो खराब मैनेजमेंट और गैरव्यवसायिकता बड़ा कारण है। प्रशासन में मौजूद लोग काम करना ही नहीं चाहते थे। ऐसी चीजें लगातार होती रही। अगर पहल की जाती है, तो बहुत प्रगति हो सकती है। हर जिला टूर्नामेंट में लगभग 600 टीमें भाग लेती हैं। बारामुल्ला जिले में 140 टीमें हैं, श्रीनगर में 200 है। क्रिकेट में उचित संरचना होनी चाहिए। एक क्रिकेट खिलाड़ी एक प्रक्रिया के माध्यम से चलता है जो उसे बेहतर बनाती है।”

हालांकि कप्तान ने माना कि सीओए के मामला अपने हाथ में लेने के बाद से जम्मू कश्मीर क्रिकेट के लिए चीजें बेहतर हुई हैं। उन्होंने कहा, “हमें मुंबई टीम जैसे स्तर पर पहुंचने में काफी वक्त लगेगा। सुविधाएं मायने रखती हैं, ये बदकिस्मती की बात है कि एसोसिएशन 50 सालों से एक मैदान बनाने में नाकाम रही है। लेकिन अब सीओए के मामला अपने हाथ में लेने के बाद से बदलाव हुआ है। पिछले छह महीनों में अच्छा खासा बदलाव दिखा है। खेल काफी पेशेवर हुआ है, अभ्यास मैच समय से हो रहे हैं और लोकल टूर्नामेंट, जिन्हें हमेशा ही नजरअंदाज किया जाता था, वो भी आयोजित हो रहे हैं। जिले में 16 क्लब हैं, क्रिकेट हमारा जुनून है। हर जिले में बदलाव हुआ है, चयनकर्ता आए हैं और खिलाड़ियों को शॉर्टलिस्ट किया है। हर कोई मेहनत कर रहा है। इतिहास में पहली बार, घरेलू सीजन शुरू होने से तीन महीने पहले से अभ्यास कैंप लगाए जा रहे हैं। पिछले साल तक हम बिना अभ्यास के होटल से निकलकर सीधा रणजी मैच खेलने चले जाते थे।”

हर भारतीय क्रिकेटर की तरह परवेज भी सबसे ऊंचे लेवल (राष्ट्रीय टीम) पर खेलना चाहते हैं और इसके लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। परवेज सचिन तेंदुलकर को अपना आदर्श मानते हैं लेकिन गेंदबाजी में वो ग्रीम स्वान, सक्लैन मुश्ताक और नथान लियोन का अनुसरण करते हैं।