भारतीय टीम कोलकाता के ईडन्‍स गार्डन में अपना पहला डे-नाइट टेस्‍ट मैच खेलने के लिए तैयार है। पिंक गेंद से होने वाले इस मैच के लिए तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। टेस्‍ट टीम के उपकप्‍तान अजिंक्‍य रहाणे ने मंगलवार को कहा कि वो सपने में भी पिंक गेंद से प्रैक्टिस कर रहे हैं। चलिए आपको बताते हैं कि यह गेंद आखिर बनती कैसे है।

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न्‍यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान बीसीसीआई के एक अधिकारी ने कहा कि पिंक गेंद की सिलाई हाथ से की गई है ताकि यह रिवर्स स्विंग में मददगार साबित हो सके। ऐसे में पिंक गेंद से स्विंग हासिल करने में अब कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।”

7 से 8 दिन में बनती है एक पिंक गेंद

अधिकारी ने बताया कि पिंक गेंद को बनाने में लगभग सात से आठ दिन का समय लगाता है और फिर इसके बाद इस पर पिंक रंग के चमड़े लगाए जाते हैं। एक बार जब चमड़ा तैयार हो जाता है तो फिर उन्हें टुकड़ों में काट दिया जाता है, जो बाद में गेंद को ढंक देता है।

अधिकारी ने आगे बताया कि इसके बाद इसे चमड़े की कटिंग से सिला जाता है और एक बार फिर से रंगा जाता है। फिर इसे सिलाई करके तैयार किया जाता है। गेंद के भीतरी हिस्से की सिलाई पहले ही कर दी जाती है और फिर बाहर के हिस्से की सिलाई होती है।

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मुख्य प्रक्रिया पूरी होने के बाद फिर गेंद को अंत में तौला जाता है। उसे मैच के लिए भेजे जाने से पहले अच्छी तरह से रंग चढ़ाया जाता है। गुलाबी गेंद पारंपरिक लाल गेंद की तुलना में थोड़ा भारी है।