R Shridhar: Players are willing to risk injuries to save that one run, which is great
रविंद्र जडेजा (AFP)

आईसीसी विश्व कप 2019 में अब तक हुए मैचों में जहां कई कमाल के कैच देखने को मिले हैं, वहीं कई बार बेहद साधारण फील्डिंग का नजारा भी दिखा। हालांकि आपको ये जानकर हैरानी शायद ही हो कि टीम इंडिया ने अब तक खेलने अपने दोनों मैचों में एक भी कैच नहीं छोड़ा है। जिसका श्रेय खिलाड़ियों के साथ साथ फील्डिंग कोच आर श्रीधर को भी जाता है।

भारतीय स्क्वाड का तेज तर्रार फील्डिंग का राज है खिलाड़ियों की प्रतिबद्धता, ऐसा कहा भारतीय फील्डिंग कोच श्रीधर ने। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी एक रन बचाने की कोशिश में चोट का खतरा उठाने तक को तैयार हैं। और उन्हें खिलाड़ियों से इसी तरह की प्रतिबद्धता की उम्मीद थी।

न्यूजीलैंड के खिलाफ बारिश की वजह से रद्दे हुए मैच के बाद मीडिया के सामने आए कोच श्रीधर ने कहा, “सबसे बड़ी बात जो मेरे लिए निकल कर आई वो है फील्डर्स का स्वभाव, जहां वो खुद से आगे टीम को रखते हैं लेकिन बाहर जाकर चैंपियनशिप जीतने के लिए आपको इसी क्वालिटी की जरूरत होती है। वो एक रन बचाने के लिए इंजरी का खतरा उठाने को तैयार हैं जो कि एक बेहतरीन क्वालिटी है।”

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विश्व कप के दौरान भारतीय टीम की शानदार फील्डिंग का एक नमूना ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में देखने को मिला जब केदार जाधव के शानदार थ्रो ने एरोन फिंच को पवेलियन भेजा। कोच श्रीधर ने इसके पीछे की प्रक्रिया पर खुलकर बात की।

उन्होंने कहा, “ये ऐसी चीज है जिस पर मेरी नजर हमेशा रहती है और हम इसके लिए काफी अभ्यास करते हैं। मैं कहूंगा कि कन्वर्टिंग, चाहे रन आउट हो या ना हो एक थ्रो को दो या तीन में बदलना ज्यादा अहम है। आप इस विचार पर मेरा आकलन ना करें लेकिन मेरे हिसाब से चार में से एक को पकड़ पाने का मतलब है आप डायरेक्ट हिट युनिट के हिसाब से अच्छा काम कर रहे हैं।”

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कोच ने आगे कहा, “लेकिन पिछले मैच (ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ) में हम ऐसा नहीं कर पाए। हमारे सामने कम से कम दस स्ट्राइक थी लेकिन हम केवल एक बार हिट कर पाए (फिंच का विकेट)। कई दिनों पर हम पांच में तीन बार हिट करते हैं। ये अभ्यास की बात है और सिस्टम पर निर्भर करता है लेकिन ये ऐसा एरिया है जिस पर हम हर नेट सेशन में कड़ी मेहनत करते हैं।”