Racial ‘banter’ not acceptable, says former west indies captain Darren Sammy
डैरेन सैमी (IPL)

पूर्व वेस्टइंडीज कप्तान डैरेन सैमी ने कहा कि अश्वेत खिलाड़ियों को नस्लीय टिप्पणियों को मजाक का हिस्सा मानकर भुलाना नहीं चाहिए। सैमी ने ये बयान तब दिया जब उन्हें पता चला कि सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेलने के दौरान साथी खिलाड़ियों का उन्हें दिया गया निकनेम असल में नस्लीय धारणाओं से जुड़ा हुआ था।

सैमी 2013 से 2014 तक आईपीएल में हैदराबाद टीम के लिए खेले थे। इस दौरान कुछ साथी खिलाड़ी उन्हें ‘कालू’ कहकर बुलाते थे। सैमी को तब इस शब्द का सही मतलब मालूम नहीं था लेकिन पिछले हफ्ते जब उन्हें समझ आया कि ये शब्द नस्लीय धारणाओं से जुड़ा है तो सैमी ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की।

विश्व कप विजेता कप्तान ने ने कहा, “ये इस तथ्य को मिटा नहीं सकता है कि कुछ शब्द जो प्रयोग किए जा रहे हैं, वो आपके रंग की वजह से आपको नीचा दिखाते हैं। मेरे लोगों को 400 साल की गुलामी क्यों झेलने के बाद भी खुद को हालात में ढालना होगा? हमेशा अश्वेत लोगों को ही उत्पीड़न के अनुकूल खुद को ढालना होना पड़ता है?”

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ईएसपीएन क्रिकइंफो को दिए बयान में उन्होंने कहा, “दूसरा पक्ष क्यों नहीं बदल सकता है और हमें अलग तरह से देख सकता है? और बस मत करो। इसलिए आप मेरी त्वचा के रंग के लिए अपमानजनक शब्दो का उपयोग नहीं कर सकते हैं और मुझसे ये नहीं कह सकते कि इसे मज़ाक के रूप में लें।”

अमेरिका के मिनीपोलिस में पुलिस हिरासत में 46 साल के अफ्रीकी-अमेरिकी जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद शुरू हुए ब्लैक लाइव्स मैटर अभियान के समर्थन में अन्य शीर्ष एथलीट के साथ क्रिकेटर्स भी शामिल हो गए हैं। सैमी ने आईसीसी से नस्लवाद के खिलाफ लड़ाई के बारे में जागरूकता बढ़ाने का आग्रह किया।

सैमी ने कहा, “आईसीसी की आचार संहिता में नस्लवाद विरोधी नियम हमेशा से था। आप हमेशा इसके बारे में सुनते हैं। लेकिन इसे मैच फिक्सिंग की तरह चर्चा का प्रमुख विषय बनाने के लिए, इस पर खास ध्यान देना होगा।”

उन्होंने कहा, “जिस तरह जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या की गई और दुनिया ने इसे देखा और इसका जो विद्रोह और आंदोलन हुआ, वो बड़ी तस्वीर है। अभी अश्वेत, अल्पसंख्यकों को लग रहा है कि वो कुछ कह सकते हैं और उनकी आवाज सुनी जा रही है।”