हार्दिक-राहुल मामले में द्रविड़ बोले, 'न करें ज्‍यादा ओवर रिएक्‍ट'

महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक शब्‍दों का इस्‍तेमाल करने के मामले में केएल राहुल, हार्दिक पांड्या जांच पूरी होने तक अंतरिम प्रतिबंध झेल रहे हैं।

Edited By : Cricket Country Staff |Jan 22, 2019, 04:52 PM IST

Published On Jan 22, 2019, 04:52 PM IST

Last UpdatedJan 22, 2019, 04:52 PM IST

Rahul Dravid @ AFP

Rahul Dravid (File Photo) @ AFP

हार्दिक पांड्या और केएल राहुल द्वारा एक चैट शो के दौरान महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्‍पणी करने के मामले में अंडर-19 और इंडिया ए टीम के कोच राहुल द्रविड़ ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्‍होंने साफ किया कि हमें अपने युवा खिलाड़ियों को शिक्षित करना होगा, इस मामले में ओवर रिएक्‍टर करने की जरूरत नहीं है।

राहुल द्रविड़ ने स्‍पोर्ट्स स्‍टार से बातचीत के दौरान कहा, “ऐसा नहीं है कि खिलाड़ियों ने पूर्व में गलतियां नहीं की हैं। ऐसा भी नहीं है कि युवाओं को सिखाने के हमारे प्रयासों के बावजूद भविष्‍य में गलतियां नहीं होंगी, लेकिन हमें इसपर ओवर रिएक्‍ट नहीं करना चाहिए।”

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राहुल द्रविड़ ने कहा कि थोड़ा बहुत मौज मस्‍ती करने में कोई गलती नहीं है, लेकिन व्‍यक्तिगत तौर पर हमें खुद के लिए नियम बनाने की जरूरत है। टाइम्‍स ऑफ इंडिया से बातचीत में द्रविड़ ने कहा, “ये गलत धारणा है कि मैंने अपने समय में इंज्‍वाय नहीं किया था, लेकिन जब आप अपने देश का प्रतिनिधित्‍व कर रहे होते हो तो लोग आपको पहचानने लगते हैं। इसे भाग्‍य कहो या दुर्भाग्‍य, पहचान मिलने के साथ-साथ आप पर जिम्‍मेदारी भी आ जाती है। ऐसे में आपको अपने लिए नियम बनाने की जरूरत होती है।”

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द्रविड़ ने कहा, “पिछले दो अंडर-19 विश्‍व कप के समय से विभिन्‍न पहलुओं पर खिलाड़ियों को लेक्‍चर दिए जा रहे हैं। खिलाड़ियों से बातचीत करने के लिए हम मनोचिकित्‍सक का कांसेप्‍ट भी लेकर आए हैं। हमने खिलाड़ियों की जिम्‍मेदारी और उनकी भूमिका को लेकर वर्कशॉप भी आयोजित की हैं। ये लेक्‍चर एनसीए का हिस्‍सा भी हैं।”

द्रविड़ का मानना है कि सीखने की सबसे अच्‍छी प्रक्रिया ड्रेसिंग रूम में सीनियर्स से शुरू होती है। हमें ओवर रिएक्‍ट करने की जरूरत बिल्‍कुल भी नहीं है। लोग ये भूल गए हैं कि पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी है। ये घटना काफी चर्चा में आ गई है, लेकिन मैं इस बात को भी मानूंगा कि हमें युवाओं को सलाह देने की जरूरत है क्‍योंकि आज के समय में ऑन फील्‍ड और ऑफ फील्‍ड की चुनौतियां अलग हैं। ऐसा नहीं है कि पहले के समय में सब कुछ अच्‍छा था और आज के समय में सब कुछ बुरा है।

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