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  • Rajni Trophy 2016-17: Rs. 500, 1,000 demonetisation drives Ranji cricketers empty pockets

500, 1,000 के नोट बंद होने से क्रिकेटरों की जेबें हुईं खाली

रणजी ट्रॉफी में 100 से ज्यादा खिलाड़ी भाग ले रहे हैं।

Edited By : Cricket Country Staff |Nov 14, 2016, 03:28 PM IST

Published On Nov 14, 2016, 03:28 PM IST

Last UpdatedNov 14, 2016, 03:28 PM IST

रणजी ट्रॉफी © IANS
रणजी ट्रॉफी © IANS

जिस दिन विराट कोहली ने अपने अथक प्रयास से इंग्लैंड के खिलाफ राजकोट में खेले जा रहे टेस्ट को ड्रॉ करवा दिया। उसी दिन देश के अन्य 100 से ज्यादा क्रिकेटर अलग ही उधेड़बुन में व्यस्त थे। दरअसल, जबसे मोदी सरकार ने भारत में भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए 500 और 1,000 के नोट बंद किए हैं तबसे यह रणजी ट्रॉफी का पहला दिन है। भले ही कल रविवार था लेकिन पूरे देश में इस दिन माहौल बहुत अलग रहा। क्योंकि बैंक इस दौरान सूरज डूबने के बाद भी खुले रहे। और लोगों की लंबी कतारें बैंक के बाहर नजर आईं। जैसा कि रणजी ट्रॉफी में 100 से ज्यादा क्रिकेटर भाग ले रहे हैं। विमुद्रीकरण की वजह से क्रिकेटरों के दैनिक अलाउंस में खुले पैसों की पाबंदी लग गई है। यह इसलिए ताकि अन्य परेशानियों से निबटा जा सके। यह परेशानी तब खड़ी नहीं होगी अगर विभिन्न एसोसिएशन सही समय पर सही डिनोमिनेशन वाले नोटों की पर्याप्त मात्रा में व्यवस्था कर लेंगे।

वरना बाकी टीमों को भी गोवा और विदर्भ की टीमों के खिलाड़ियों की तरह परेशान होना पड़ेगा जो आजकल मुंबई और कोलकाता में मैच खेल रहे हैं। इस बात को गहराई से बताना मुमकिन नहीं है कि किस टीम को ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गोवा टीम जो केरल टीम को ब्रेबोन स्टेडियम में कठिन चुनौती दे रही है उसके खिलाड़ी ऐसे होटल में ठहरे हुए हैं जो मुफ्त का नाश्ता दे रहा हैं लेकिन इसके अलावा उन्हें कोई अन्य मील नहीं मिल रहा है। इसलिए खिलाड़ियों के पास अन्य कोई विकल्प नहीं बचा है सिवाय पास के रेस्टोरेंट से खाना ऑर्डर करने के। जिससे उन्हें और भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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गोवा के कोच प्रकाश मायकर ने कहा, “अगर हम ऑर्डर करते हैं तो हमें 500 और 1,000 के खुले पैसे देने होते हैं। किसी तरह से हम इनकी व्यवस्था कर रहे हैं। कुछ खिलाड़ी बाहर गए और अपने कार्ड्स से पेमेंट किया। लेकिन हर दिन सिर्फ खाना लाने के लिए बाहर जाना कठिन है। हमारे पास बिल्कुल भी खुले पैसे नहीं हैं क्योंकि हमें प्रतिदिन 1,000 रुपए मिलते हैं। जैसे तैसे हम इसकी व्यवस्था कर रहे हैं। पिछली रात मैंने अपने मैनेजर से कहा था उसने कुछ खुले रुपयों की व्यवस्था की थी। लेकिन हम हर रोज ये करने के लिए अपने मैनेजर से नहीं कहते रहेंगे।”  भारत बनाम इंग्लैंड पहले टेस्ट का पूरा स्कोरकार्ड यहां देखें

लेकिन गोवा की टीम की हालत विदर्भ टीम से फिर भी बेहतर है। टीम के मैनेजर किशोर वाकोड़े ने इस बात को बताने में कोई भी संकोच नहीं किया कि उनकी टीम परेशानी में है। क्योंकि उनके पास बिल्कुल भी कैश नहीं बचा है। बात यहां तक बढ़ गई है कि उनके एसोसिएशन ने क्रिकेट एसोसिएशन बंगाल को मदद के लिए संपर्क किया है। जो उनके महाराष्ट्र के खिलाफ मैच में ईडेन गार्डन की मेजबानी कर रहा है।

मुंबई के खिलाड़ियों को भी 500 और 1,000 के नोटों के बंद होने से परेशाना हो रही है। इसकी वजह से उन्हें होटल में ही रहना पड़ रहा है और वह बाहर डिनर के लिए भी नहीं जा पा रहे हैं। जो घरेलू क्रिकेट में क्रिकेटरों का रात का रुटीन होता है। मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने अपने खिलाड़ियों से कहा है जो आजकल मैसूर में हैं, कि वे रूम सर्विस खूब करें। एमसीए ज्वाइंट सेक्रेटरी अन्मेश खानविल्कर ने कहा, “हमने उनसे कहा है कि हम बिल बात में भर देंगे और कहा है कि अगर कोई बाहर से ऑर्डर करना चाहता है तो वह करे। हम उस पैसे को बाद में उनके अकाउंट में रिइम्बर्स(प्रतिपूर्ति) कर देंगे। उन्होंने कहा, “हम नहीं चाहते कि हमारे खिलाड़ी नोटों को बदलवाने के लिए लाइन में खड़े रहें। इन खिलाड़ियों में कई जानें- मानें खिलाड़ी हैं और इससे सिक्युरिटी को लेकर भी समस्या हो सकती है।”

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