मशहूर इतिहासकार रामचंद्र गुहा (Ramchandra Guha) ने अपनी साल 2017 में चैंपियंस ट्रोफी के बाद टीम इंडिया में कोच और कप्तान के विवाद को एक बार फिर याद किया है. इंग्लैंड में आयोजित हुए इस टूर्नामेंट में भारत विराट कोहली की कप्तानी में उतरा था. यहां टीम इंडिया खिताबी मुकाबले में पाकिस्तान के खिलाफ हार गई थी. तब भारतीय टीम के कोच अनिल कुंबले (Anil Kumble) थे. इस टूर्नामेंट के बाद कप्तान और कोच की तकरार सामने आई थी, जिसके बाद अनिल कुंबले ने कोच पद से इस्तीफा दे दिया था.

रामचंद्र गुहा सुप्रीम कोर्ट द्वारा बीसीसीआई का कामकाज देखने के लिए नियुक्त की गई प्रशासकों की समिति (CoA) के सदस्य भी रह चुके हैं. उन्होंने हाल ही में क्रिकेट वेबसाइट क्रिकइन्फो को दिए इंटरव्यू में टीम इंडिया के इस विवादित क्षण को फिर से याद किया. गुहा ने टीम इंडिया के कप्तान को मिलीं इतनी शक्तियों पर सवाल खड़े किए हैं.

उन्होंने कहा, ‘मैं कोहली और अनिल कुंबले के बीच के विवाद की बात कर रहा हूं. कोहली को यह शक्ति कैसी मिल सकती है कि वह इस बात का चुनाव करें कि टीम का कोच कौन होगा कौन नहीं? यह किसी भी टीम में नहीं होता है, दुनिया में कहीं भी नहीं.’

इस इतिहासकार ने सीओए की उस बैठक का भी जिक्र किया. जिसमें उन्होंने महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) को केंद्रीय अनुबंध की ग्रेड में बदलाव करने की बात कही थी क्योंकि वह टेस्ट से संन्यास ले चुके थे. उन्होंने कहा कि सीओए के बाकी सदस्य ऐसा करने से डर रहे थे.

उन्होंने कहा, ‘धोनी ने फैसला कर लिया था कि वह टेस्ट क्रिकेट नहीं खेलेंगे. वह सिर्फ वनडे (और टी20I) खेलेंगे. मैंने कहा था (सीओए में) कि उन्हें ग्रेड-A का अनुबंध नहीं मिलना चाहिए. साफ बात है, यह अनुबंध उन खिलाड़ियों के लिए है जो तीनों प्रारूप खेलते हों. वह टेस्ट नहीं खेलना चाहते यह उनका फैसला है. उन्होंने कहा, नहीं, हमें उन्हें A से B ग्रेड में लाने में डर लगता है.

बोर्ड से ज्यादा सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त कि गई CoA जिसका अध्यक्ष सीनियर आईएएस थे और वो कमेटी डरी हुई थी. मुझे लगा कि यह बड़ी समस्या है. इसलिए मैंने इसका विरोध किया. जब मैं कुछ कर नहीं सका तो मैंने इसके बारे में लिखा.’ क्रिकेट पर गुहा की नई किताब आई है- ‘द कॉमनवेल्थ ऑफ क्रिकेट’ इस पुस्तक के सिलसिले में ही गुहा ने इएसपीएन क्रिकइन्फो से बातचीत की है.

इस दौरान उन्होंने पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी (Bishon Singh Bedi) की जमकर प्रशंसा की है. उन्होंने कहा, ‘एक बार बेदी ने टीवी पर एक इंटरव्यू में कुछ कह दिया था तो उन्हें 1974 बेंगलुरु टेस्ट में बैन कर दिया गया था. खिलाड़ियों को ज्यादा ताकत चाहिए थी, उन्हें अच्छे से वेतन मिलना चाहिए था, जिसमें काफी लंबा समय लगा. बेदी और सुनील (गावस्कर) की पीढ़ी को उनके करियर के अंत तक ज्यादा पैसा नहीं मिलता था.’