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रणजी ट्रॉफी खिलाड़ियों को बीते दो सीजन से नहीं मिली है सैलरी

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्‍त सीओए विनोद राय के गतिरोध के कारण पिस रहे हैं खिलाड़ी

user-circle cricketcountry.com Written by Cricket Country Staff
Last Updated on - March 6, 2018 2:26 PM IST

बीसीसीआई वैसे तो दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड होने का दम भरता है, लेकिन मौजूदा समय में बोर्ड ने बीते दो सीजन से रणजी ट्रॉफी घरेलू टूर्नामेंट खेलने वाले खिलाड़ियों को बीते दो सीजन से उनकी सैलरी तक नहीं दी है। बीसीसीआई ब्रॉडकास्‍ट राइट्स व डिजिटल राइट्स सहित अन्‍य माध्‍यमों से खूब कमाई करता है। बीसीसीआई की छवि है कि वो अपने अंतरराष्‍ट्रीय व घरेलू मैच खेलने वाले खिलाड़ियों की झोली कभी खाली नहीं रहने देता है, लेकिन इस बार वो एक ऐसे बवंडर में फंसा है कि चाह कर भी अपने रणजी खिलाड़ियों को बीते दो सीजन से पूरी सैलरी नहीं दे पाया है।

इंडियन एक्‍सप्रेस की खबर के मुताबिक रणजी ट्रॉफी खेलने के लिए सभी खिलाड़ी राज्‍य इकाई से मिलने वाले हिस्‍से को प्राप्‍त कर चुके हैं, लेकिन बीसीसीआई की तरफ से मिलने वाला शेयर उन्‍हें नहीं मिला है।खिलाड़ियों को बीसीसीआई की सालाना कमाई में से 10.6 प्रतिशत लॉयंस शेयर के नाम पर मिलते हैं। खिलाड़ियों को मिलने वाला ये हिस्‍सा बीसीसीआई की वेरिएबल इंकम पर निर्धारित रहता है। एक अनुमान के मुताबिक नियमित रूप से रणजी ट्रॉफी खेलने वाले खिलाडि़यों को बीसीसीआई सालाना 12 से 15 लाख रुपये देता है। लेकिन बीते दो सीजन से खिलाड़ियों को ये राशि नहीं मिली है।

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बताया जा रहा है कि सुपीम कोर्ट द्वारा नियुक्‍त की गई प्रशासकों की कमेटी (सीओए) के अध्‍यक्ष विनोद राय और क्रिकेट के राज्‍य संघों के बीच गतिरोध के कारण ऐसा हो रहा है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि जस्टिस लोढ़ा समिति की सिफारिशों को जल्‍द से जल्‍द बीसीसीआई लागू करे। खिलाड़ियों को सैलरी नहीं मिलने के पीछे सीओए द्वारा पेमेंट के नए प्‍लान पर काम करना भी बताया जा रहा है। सीओए द्वारा पद संभालने के बाद से कोई जनरल बॉडी मीटिंग नहीं हुई है। जिसके चलते अकाउंट क्‍लीयर नहीं हो पाए हैं। ऐसे में ये स्‍पष्‍ट नहीं है कि खिलाड़ियों को क्‍या राशि दी जानी चाहिए।

बीसीसीआई का इनकम डिस्ट्रिब्‍यूशन फार्मुला कहता है कि रेवेन्‍यू में से 26 प्रतिशत राशि खिलाड़ियों को दी जाएगी। इसमें से 13 प्रतिशत अंतरराष्‍ट्रीय खिलाड़ियों और 10.6 प्रतिशत घरेलू खिलाड़ियों और बाकी बची रकम को महिला टीम और जूनियर खिलाडि़यों को दी जाती है। मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के ज्‍वाइंट सैकेटरी उनमेश ने अखबार से बातचीत के दौरान खिलाड़ियों को सैलरी नहीं मिलने की बात कबूल की। उन्‍होंने कहा, एजीएम होने के बाद ही खिलाड़ियों को सैलरी मिलने को लेकर स्थिति स्‍पष्‍ट हो पाएगी, लेकिन हमें नहीं पता है कि ये मीटिंग कब होगी। हम अपना हिस्‍सा दे चुके हैं। बीसीसीआई की तरफ से हमे हिस्‍सा नहीं मिला है।