Ranji Trophy 2018-19: Vidarbha Spinner Aditya Sarwate life has not been easy
Aditya-Sarwate @ PTI

विदर्भ की लगातार दूसरी रणजी ट्रॉफी खिताबी जीत का अहम हिस्सा रहे ऑलराउंडर आदित्य सरवटे ने बचपन से ही अपनी मां अनुश्री सरवटे की अथक मेहनत और संघर्ष को देखा है और उसी से प्रेरणा लेकर वह अपने जीवन में आगे बढ़ रहे हैं।

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आदित्य महज तीन साल के थे, तभी उनके पिता आनंद सरवटे का एक्सीडेंट हो गया था। तब से वह व्हीलचेयर पर हैं। इसके बाद उनकी मां ने घर की जिम्मेदारी ली। तमाम दिक्कतों के बाद भी उनकी मां ने हार नहीं मानी और बेटे को आगे बढ़ाती रहीं। मां की इसी हार न मानने के नजरिए को आदित्य ने अपने जेहन में उतार लिया।

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आदित्‍य को क्रिकेट खून में मिला है। आदित्य के पिता भी क्रिकेटर रहे हैं। वह नागपुर विश्वविद्यालय और पंजाब नेशनल बैंक के लिए खेला करते थे। इसके अलावा उनके ताऊ चंदू सरवटे ने भारत के लिए नौ टेस्ट मैच खेले हैं। चंदू होल्कर टीम के दिग्गज थे और सीके नायडू और मुश्ताक अली जैसे महान खिलाड़ियों के साथ भारतीय टीम का ड्रेसिंग रूम साझा कर चुके हैं।

‘मां से बहुत प्रेरित हूं’

आदित्य ने साक्षात्कार में कहा, ‘एक खिलाड़ी परिवार के बिना कुछ नहीं है। क्रिकेट मुझे विरासत में मिली लेकिन मैं आज जो कुछ हूं, उसके लिए मैं अपनी मां का आभारी हूं। मैं जब तीन साल का था तब मेरे पिता का एक्सीडेंट हो गया था। तब से मेरी मां ने ही सब कुछ किया। नौकरी भी की। पापा का ध्यान भी रखा। मेरा भी ध्यान रखा। मुझे पूरी छूट दी। मैं उनसे काफी प्रेरित रहा हूं। उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी और उनका जो नजरिया है, वो मेरे अंदर भी है।’

‘तब लोगों ने खिताबी जीत को तुक्‍का कहा था’

विदर्भ ने इस साल सौराष्ट्र को मात देकर इस सीजन अपने खिताब को सफलतापूर्वक बचाया। इस सफलता के बारे में पूछे जाने पर आदित्य ने कहा कि पिछली बार कई लोगों ने हमारी टीम की जीत को तुक्का करार दिया था। इस बार हमें उन्हें गलत साबित करना था और हमने किया।

उन्होंने कहा, ‘पिछले सीजन की हमारी जीत को कई लोगों ने तुक्का कहा था तो इस बार हमें अपने आपको साबित करना था। पहले से हमें इस पर विश्वास था कि हम ऐसा कर सकते हैं। हमने हर मैच को करो या मरो के तौर पर लिया।’

11 मैचों में 55 विकेट के साथ 354 रन भी बनाए 

बीते सीजन आदित्य ने सिर्फ छह मैच खेले थे, लेकिन इस बार उन्होंने टीम के लिए कुल 11 मैच खेले और 55 विकेट लिए तथा 354 रन बनाए, जिसमें एक शतक शामिल हैं।

दोनों पारियों में पुजारा को किया आउट 

फाइनल में विदर्भ की जीत की एक अहम वजह सौराष्ट्र के मुख्य बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा का विकेट रहा। आदित्य ने ही दोनों पारियों में उन्हें अपनी फिरकी में फंसाया। फाइनल में आदित्य ने 157 रन देकर 11 विकेट लिए और मैन ऑफ द मैच भी रहे।

पुजारा को लेकर तैयारी के बारे में आदित्य ने कहा, ‘प्लानिंग सिर्फ पुजारा के लिए नहीं थी। विपक्षी टीम के सभी खिलाड़ियों के लिए हमने तैयारी की थी। हम विपक्षी टीम के हर खिलाड़ी के वीडियो देखते हैं। पुजारा का यह था कि अगर वह शुरुआत में आउट नहीं होते तो लंबा खेलते हैं। हमारा यही प्‍लान था कि शुरुआत में ही उन पर दबाव बनाएं। विकेट से भी काफी मदद मिल रही थी। ऐसे में मैंने सिर्फ सही जगह पर गेंद डालने का सोचा और सफल रहा।’

(इनपुट-एजेंसी)