सौराष्ट्र और बंगाल के बीच राजकोट में खेला गया रणजी ट्रॉफी 2019-20 फाइनल मुकाबला 5वें और अंतिम दिन गुरुवार को ड्रॉ हो गया लेकिन पहली पारी की बढ़त के आधार पर सौराष्ट्र पहली बार चैंपियन बनने में सफल रहा. सौराष्ट्र ने कप्तान जयदेव उनादकट के अहम मौके पर शानदार स्पैल की बदौलत पहली पारी में 425 रन बनाए थे जिसके जवाब में बंगाल की पहली पारी 381 रन पर ढेर हो गई थी. सौराष्ट्र को पहली पारी में 44 रन की बढ़त प्राप्त थी.

बंगाल 5वें दिन का खेल शुरू होने से पहले पहली पारी में बढ़त हासिल करने की बेहतर स्थिति में दिख रहा था. अनुस्तुप मजूमदार (63) और अर्णब नंदी (नाबाद 40) ने गुरुवार को अंतिम सेशन में 91 रन जोड़कर टीम की उम्मीदें जगा दी थी.

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लेकिन सेमीफाइनल में गुजरात के खिलाफ अंतिम दिन 7 विकेट लेकर सौराष्ट्र को फाइनल में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले उनादकट ने फिर से सही समय पर बेहतरीन गेंदबाजी की और अपनी टीम को इतिहास रचने के करीब पहुंचाया.

सर्वकालिक रिकॉर्ड से एक विकेट पीछे रह गए उनादकट

बाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज उनादक ने मजूमदार को एलबीडब्ल्यू आउट किया और फिर आकाशदीप को रन आउट किया. इन दोनों के तीन गेंद के अंदर आउट होने से मैच का पासा पलट गया. उनादकट ने सत्र में 13.23 की औसत से सर्वाधिक 67 विकेट लिए लेकिन वह सर्वकालिक रिकॉर्ड से एक विकेट पीछे रह गए.

सुबह के सेशन में एक घंटे दस मिनट का खेल महत्वपूर्ण साबित हुआ. इस बीच 27 रन बने और बंगाल ने अपने बाकी बचे चारों विकेट गंवाए. उसकी टीम 381 रन पर आउट हो गई.

…तब दोनेां कप्तानों ने मैच समाप्त करने पर जताई सहमति

सौराष्ट्र ने दूसरी पारी में जब 34 ओवर में 3 विकेट पर 105 रन बनाए थे तब दोनेां कप्तानों ने मैच समाप्त करने पर सहमति जता दी. सौराष्ट्र ने इस तरह से रणजी ट्रॉफी चैंपियन में अपना नाम लिखवाया जबकि बंगाल का 1989-90 के बाद पहला खिताब जीतने का इंतजार बढ़ गया.

बंगाल के लिए यादगार रहा मौजूदा सीजन

उप विजेता बनने के बावजूद बंगाल के लिए यह यादगार सत्र रहा और वह 13 साल बाद फाइनल में पहुंचा. उसकी तरफ से तेज गेंदबाजी की तिकड़ी आकाशदीप, मुकेश कुमार और इशान पोरेल तथा अनुभवी बल्लेबाज मनोज तिवारी और मजूमदार ने अहम भूमिका निभाई. सौराष्ट्र के लिए शेल्डन जैकसन, अर्पित वासवदा और कप्तान उनादकट की भूमिका महत्वपूर्ण रही.

पांचवें दिन मुश्किल परिस्थितियों में उनादकट ने खुद जिम्मा संभाला

पांचवें दिन चेतन सकारिया के साथ गेंदबाजी का आगाज करने वाले उनादकट ने शुरू में रक्षात्मक फील्डिंग लगाया क्योंकि चौथे दिन टीम ने बंगाल को आसानी से रन बनाने दिए थे.

सौराष्ट्र का सारा दारोमदार कप्तान पर टिका था. उन्होंने अपने महत्वपूर्ण ओवर से पहले 32 ओवर किए थे और उन्हें विकेट नहीं मिला था. लेकिन फिर भी उनादकट ने हिम्मत नहीं हारी और मुश्किल परिस्थितियों में खुद जिम्मा संभाला.

मजूमदार ने 58 और नंदी ने 28 रन से अपनी पारी आगे बढ़ाई और लग रहा था कि वे जरूरी 72 रन बनाकर अपनी टीम को पहली पारी में बढ़त दिला देंगे. उनादकट ने ऐसे में तेजी से अंदर आती गेंद पर मजमूदार को पगबाधा आउट करके नंदी के साथ उनकी 98 रन की साझेदारी समाप्त की.

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मजूमदार को पवेलियन भेजने के बाद उनादकट ने अपनी सतर्कता से आकाशदीप को रन आउट किया. आकाशदीप क्रीज के बाहर खड़े थे. विकेटकीपर ने इसे भांप दिया लेकिन उनका सीधा थ्रो विकेट पर नहीं लगा और ऐसे में गेंदबाज ने विकेट उखाड़ा. इस तरह से सौराष्ट्र को तीन गेंद के अंदर दूसरा विकेट मिल गया.

इसके पांच ओवर बाद धर्मेन्द्रसिंह जडेजा ने मुकेश कुमार को शार्ट लेग पर कैच करवाया. इसके लिये उन्होंने डीआरएस का सहारा लिया. जब बंगाल 55 रन पीछे था तब नंदी ने अपनी तरफ से काफी प्रयास किए. उनादकट ने 11वें नंबर के बल्लेबाज पोरेल को एलबीडब्ल्यू आउट करके बंगाल की पारी का अंत किया.

खाली स्टेडियम में खेला गया पांचवें दिन का खेल

कोरोना वायरस के खतरे के कारण यह मैच खाली स्टेडियम में खेला जा रहा था लेकिन सौराष्ट्र के खिलाड़ियों का जश्न स्टेडियम को गुंजायमान करने के लिए पर्याप्त था.