रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले में इस बार डीआरएस का उपयोग किया जाएगा. सेमीफाइनल मुकाबले शनिवार से शुरू होंगे जिसमें बंगाल, कर्नाटक, सौराष्ट्र और गुजरात की टीमें अंतिम-4 में भिड़ेंगी. मैच के दौरान प्रत्येक टीमों को प्रत्येेेक पारी में 4 बार डीआरएस इस्तेमाल करने की अनुमति होगी. बंगाल के कोच अरूण लाल और कप्तान अभिमन्यु ईश्वरन ने गुरुवार को पहली बार रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में डीआरएस इस्तेमाल करने के बीसीसीआई के कदम का स्वागत किया.

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अंपायरों की फैसला समीक्षा प्रणाली (डीआरएस) का इस्तेमाल पहली बार भारत के घरेलू सर्किट में शनिवार से शुरू होने वाले दो रणजी सेमीफाइनल में किया जाएगा लेकिन इसमें सीमित विकल्प होंगे क्योंकि इसमें कोई हॉकआई, स्निकोमीटर या अल्ट्राएज नहीं होगा.

पर सेमीफाइनल में पहुंचने वाली चार टीमों -बंगाल, कर्नाटक, सौराष्ट्र और गुजरात- को इसका फायदा होगा जिन्हें प्रत्येक पारी में चार रिव्यू मिलेंगे.

अरूण लाल ने कर्नाटक के खिलाफ अपने अंतिम चार मुकाबले से पहले पत्रकारों से कहा, ‘मुझे डीआरएस का इतना अनुभव नहीं है. यह सीमित विकल्प वाला होगा, लेकिन उम्मीद करते हैं कि इससे कुछ बड़ी गलतियां कम की जा सकेंगी.’

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बंगाल के कप्तान ईश्वरन ने कहा, ‘यह नई चीज है, लेकिन खिलाड़ी टीवी पर इसे काफी देख चुके हैं इसलिये हम थोड़ा बहुत जानते हैं कि यह कैसे काम करता है.’ पिछले साल तक बोर्ड का कामकाज देख रही सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) ने रणजी ट्रॉफी के नॉकआउट मुकाबलों में डीआरएस इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। हालांकि क्वार्टर फाइनल मुकाबलों में इसका इस्तेमाल नहीं किया गया था.