भारतीय स्पिनर रविचंद्र अश्विन (Ravichandran Ashwin) का कहना है कि वो अपने ही बनाए पैमानों के खिलाफ ही लड़ रहे हैं क्योंकि विदेशों में उनके टेस्ट प्रदर्शन की तुलना हमेशा ही घरेलू प्रदर्शन से की जाती है।

टीम इंडिया का ये सीनियर स्पिनर पिछले कई सालों से टेस्ट फॉर्मेट में भारत की सफलता में अहम भूमिका निभाते आ रहे हैं। हालांकि इस बीच उन्हें एशिया के बाहर मैच खेलने के ज्यादा मौके नहीं मिले है।

ईएसपीएनक्रिकइंफो से बातचीत में अश्विन ने कहा, “देखों, एक चीज निश्चित है। मैं कई तरीकों से अपने ही बेंचमार्क तोड़ने की कोशिश कर रहा हूं। मैंने अपने और देश के लिए कितने मैच जीते हैं, जब भी मैं देश से बाहर खेलता हूं तो मेरे द्वारा हासिल की गई सफलता और मेरे द्वारा दिखाई गई उत्कृष्टता को हमेशा बराबरी से मापा जाता है, जो अच्छा है।”

कोरोना वायरस लॉकडाउन से ठीक पहले हुए भारत के न्यूजीलैंड दौरे पर अश्विन ने टेस्ट सीरीज का पहला ही मैच खेला था लेकिन दूसरे मैच में उनकी जगह रविंद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। साल 2016 के वेस्टइंडीज दौरे के बाद से अश्विन ने एशिया के बाहर मात्र 12 टेस्ट मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने 44 विकेट लिए।

अश्विन ने कहा, “इंग्लैंड में मैंने जितने मैच खेले हैं, मुझे ये एहसास होने लगा कि किसी स्पिनर के लिए विदेशी हालातों में गेंदबाजी करने और घरेलू मैदान जैसी सफलता हासिल करने के लिए आपको मैच में हर समय सही गेंदबाजी करनी होती है।”

उन्होंने कहा, “और दूसरी बात ये कि आपको थोड़ी किस्मत की भी जरूरत होती है। 2014 के बाद जब मैंने वो दक्षिण अफ्रीकी वाला मैच खेला था तो मैंने अपने आंकड़ों को गंभीरता से देखा और वो पहले से काफी बेहतर हुए थे।”