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रॉबिन उथप्पा का मानना, हाईएस्ट लेवल पर क्रिकेट खेलने का दवाब है मानसिक थकान का कारण

रॉबिन उथप्पा ने कहा कि शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक फिटनेस भी महत्वपूर्ण है।

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समय के साथ क्रिकेट काफी बदल चुका है। T20 क्रिकेट के युग में एक क्रिकेटर के लिए खुद को शारीरिक रुप से फिट रखने के अलावा मेंटली फिट रखना भी काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसा मानना है पूर्व भारतीय क्रिकेटर रॉबिन उथप्पा का। रॉबिन उथप्पा ने कहा कि शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक फिटनेस भी महत्वपूर्ण है। उथप्पा ने मेंटल हेल्थ पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को मानसिक थकान ज्यादा क्रिकेट खेलने से नहीं बल्कि उच्चतम स्तर पर क्रिकेट खेलने की काबिलियत हासिल करने के लिए मेहनत की वजह से हो रही है।

उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि खिलाड़ियों को मानसिक थकान बहुत ज्यादा क्रिकेट खेलने की वजह से हो रही है, लेकिन उच्चतम स्तर पर क्रिकेट खेलने का जो दवाब है, वो मानसिक थकान का एक कारण बनता है।”

उथप्पा चेन्नई सुपर किंग्स का भी हिस्सा रहे हैं और उन्होंने काफी समय धोनी के साथ बिताया है। उथप्पा से जब पूछा गया कि क्या धोनी से किसी तरह फिटनेस टिप्स उन्हें मिली, तो उन्होंने कहा, “नहीं, मैंने धोनी से कोई फिटनेस टिप्स नहीं लिया। मुझे लगता है कि जहां तक फिटनेस का सवाल है तो प्रत्येक क्रिकेटर या खिलाड़ी का अपना तरीका होता है। इसलिए, मुझे लगता है कि उनका ट्रेनिंग और फिटनेस का अपना तरीका है जो उन्हें मैच से पहले मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करने में मदद करता है। मुझे लगता है कि शारीरिक और मानसिक फिटनेस को लेकर हर खिलाड़ी का अपना दृष्टिकोण होता है।”

शारीरिक फिटनेस और मेंटल हेल्थ को लेकर जब जाने-माने फिटनेस एक्सपर्ट सोहराब से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि शारीरिक और मेंटल फिटनेस दोनों ही काफी जरुरी हैं। सोहराब ने कहा, “मेरी नजर में शारीरिक और मानसिक फिटनेस निश्चित रूप से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यदि आप शारीरिक रूप से फिट हैं तो यह आपको आत्मविश्वास देता है और आपके जीवन के अन्य पहलुओं में भी झलकता है। ट्रेनिंग से एंडोर्फिन रिलीज होता है, जो आपको अच्छा महसूस करने में मदद करता है।”

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