भारतीय टीम के सलामी बल्‍लेबाज रोहित शर्मा के लिए 2019 काफी यादगार रहा. 2019 की शुरुआत में साउथ अफ्रीका दौरे पर खराब प्रदर्शन के बाद उन्‍हें टेस्‍ट टीम से बाहर किया गया था. अफ्रीकी टीम के भारत दौरे से उन्‍होंने बतौर सलामी बल्‍लेबाज खेल के सबसे लंबे प्रारूप में शानदार वापसी की. रोहित शर्मा ने इसपर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुझे पता था कि मैं 22 या 23 साल का नहीं हूं जो मुझे टेस्‍ट क्रिकेट में बार-बार मौके मिलते रहेंगे.

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रोहित शर्मा ने बुरे वक्‍त को याद करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब उन्‍होंने टेस्‍ट क्रिकेट में वापसी के बारे में सोचना ही छोड़ दिया था.

न्‍यूज एजेसी पीटीआई से बातचीत के दौरान रोहित ने कहा, ‘‘पत्नी और बेटी ने मेरे जीवन को प्यार और खुशी से भर दिया है और मैं इसी में रहने का प्रयास करता हूं. यह नहीं सोचता कि कोई मेरे बारे में क्या टिप्पणी कर रहा है.

वनडे-टी20 क्रिकेट के उपकप्‍तान ने कहा, ‘‘मैं उस उम्र को पार कर गया हूं कि किसी के मेरे बारे में अच्छा या बुरा कहने पर प्रतिक्रिया दूं. ईमानदारी से कहूं तो अब यह अधिक मायने नहीं रखता.’’

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बतौर सलामी बल्‍लेबाज रोहित शर्मा ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ दोहरा शतक भी जड़ा. जिसके बाद से उनकी तुलना वीरेंद्र सहवाग से भी की जाने लगी है. रोहित ने कहा, ‘‘ईमानदारी से कहूं तो मैंने काफी पहले टेस्ट मैचों के बारे में सोचना छोड़ दिया था.’’

‘‘पहले मैं टेस्ट मैचों में सफलता के बारे में काफी सोचता था. मैं काफी अधिक सोचता था कि ऐसा क्यों हो रहा है, मैंने यह शॉट क्यों खेला. प्रत्येक टेस्ट पारी के बाद मैं हमारे वीडियो विश्लेषक के पास जाता, उसके साथ बैठकर वीडियो देखता और फिर और अधिक भ्रमित हो जाता. असल में मैं जो कर रहा था वह सही चीज नहीं थी.’’

उन्होंने कहा, ‘‘तकनीक के बारे में काफी अधिक सोचने से मैं खेल का लुत्फ नहीं उठा पा रहा था. मेरे दिमाग में सिर्फ यही था कि मुझे टेस्ट क्रिकेट में अच्छा करना है. इसलिए 2018-19 ऑस्ट्रेलिया सीरीज से पहले मैंने स्वयं से कहा कि जो होना है वो होगा और मैं अपनी तकनीक के बारे में नहीं सोचूंगा.’’

‘‘मुझे पता था कि मैं 22 या 23 साल का नहीं हूं जिसे टेस्ट क्रिकेट में मौके मिलते रहेंगे. मुझे पता था कि मुझे हर बार क्रीज पर उतरते हुए खुद को साबित करना होगा. मैं खुशकिस्मत था कि मुझे वह मौका मिला जिसका कई लोगों को इंतजार था.’’