शांताकुमारन श्रीसंत © Getty Images
शांताकुमारन श्रीसंत © Getty Images

बागी भारतीय क्रिकेटर एस श्रीसंत ने केरल उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जिसमें बीसीसीआई को यह निर्देश देने को कहा गया है कि वे अप्रैल में स्काटलैंड के क्लब की ओर से खेलने की इस तेज गेंदबाज को स्वीकृति दें। श्रीसंत ने अपनी याचिका में उन पर बीसीसीआई की अनुशासन समिति द्वारा लगाए आजीवन प्रतिबंध को चुनौती देते हुए कहा कि मैच फिक्सिंग मामले की सुनवाई करने वाली सुनवाई अदालत ने भी कहा था कि प्रथम दृष्टया आरोपियों के खिलाफ किसी अपराध का मामला नहीं बनता जिसमें माकोका की धारा तीन भी शामिल है और वे आरोप मुक्त किए जाने के हकदार हैं।

पटियाला हाउस अदालत ने जुलाई 2015 में आईपीएल छह स्पाट फिक्सिंग मामले के सभी 36 आरोपियों को आरोप मुक्त किया था जिसमें श्रीसंत, अंकित चव्हाण और अजित चंदीला भी शामिल थे। बीसीसीआई ने आदेश के बाद अपनी अनुशासन समिति के फैसले को बदलने से इनकार कर दिया था। इससे पहले इस बारे में श्रीसंत ने कुछ समय पहले कहा, “जब किसी भी आधिकारिक पत्र में मुझ पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की बात नहीं लिखी है तो फिर कोई मुझे क्यों रोकेंगा। मुझे कोई मेल या कुरियर नहीं भेजा गया हो जिससे यह स्पष्ट होता हो कि मुझे आजीवन क्रिकेट खेलने से प्रतिबंधित किया गया है। यहां तक कि मेरे राज्य या तहसील एसोसिएशन को भी इस तरह का कोई पत्र नहीं दिया गया है।” [ये भी पढ़ें: आजीवन प्रतिबंध के बावजूद क्रिकेट खेलेंगे श्रीसंत]

श्रीसंत ने हिंदुस्तान टाइम्स अखबार के हवाले से कहा था कि, “जब मै तिहार जेल में था तब मुझे निलंबन पत्र मिला था। यह पत्र केवल 90 दिनों के लिए वैध होता है। बीसीसीआई ने मेरे आजीवन प्रतिबंध की बात केवल मीडिया में कही है। इस बारे में अब तक कोई आधिकारिक पत्र – व्यवहार नहीं किया गया है। मैं बेवकूफ था जो अब तक क्रिकेट से दूर रहा। अब जाकर मुझे समझ आया कि मैं क्या कर रहा था।”