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सचिन तेंदुलकर सबसे काबिल खिलाड़ी थे, उन्होंने मैदान पर अपना 100% प्रभाव छोड़ा: आकिब जावेद
पूर्व पाकिस्तानी तेज गेंदबाज आकिब जावेद ने कहा सचिन ने जो प्रभाव सचिन ने छोड़ा है, वह उसे आज भी भुला नहीं पाए हैं
Published On Nov 16, 2020, 07:39 PM IST
Last UpdatedNov 16, 2020, 07:39 PM IST
दुनिया में सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) का मुरीद भला कौन नहीं है. पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज आकिब जावेद (Aaqib Javed) ने मास्टर ब्लास्टर के साथ खेले अपने दिनों को एक बार फिर याद किया है. आकिब ने कहा कि मैदान पर कांटे की टक्कर के दौरान जो प्रभाव सचिन ने छोड़ा है, वह उसे आज भी भुला नहीं पाए हैं. आकिब जावेद ग्लोफैन्स के साथ फैन चैट पर ‘क्यू 20’ से खास बातचीत कर रहे थे.
दुनिया के महान बल्लेबाज सचिन ने 31 साल पहले 15 नवंबर 1989 को पाकिस्तान के ही खिलाफ महज 16 साल की उम्र में इंटरनेशलन क्रिकेट में कदम रखा था. इस मौके पर ग्लोफैन्स ने आकिब जावेद से प्रशंसकों के 20 सवाल पूछे थे. सचिन का जिक्र आने पर आकिब ने दिल खोलकर अपने दौर के महान बल्लेबाज की शान में कसीदे पढ़े.
दाएं हाथ के इस पूर्व फास्ट बॉलर ने सचिन की तारीफ करते हुए कहा कि वे बहुत ही प्रतिभाशाली बल्लेबाज हैं. मास्टर ब्लास्टर कई वर्षों तक नंबर 1 बल्लेबाज भी रहे. आईएएनएस द्वारा दी गई इस रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोफैन्स के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में आकिब ने सचिन के बारे में कहा, ‘सचिन के पास जितना टैलेंट था, उन्होंने बिलकुल 100 फीसदी प्रभाव छोड़ा. सचिन बहुत काबिल खिलाड़ी थे.’
बता दें 48 साल के आकिब 1988 से 1998 तक पाकिस्तान के लिए खेल चुके हैं. उन्होंने 163 वनडे मैचों में 182 और 22 टेस्ट में 54 विकेट अपने नाम किए. आकिब को 1991 में भारत के खिलाफ एक मैच में 7 विकेट झटकने के लिए भी जाना जाता है. इस दौरान उन्होंने एक हैट्रिक भी अपने नाम की थी. जिसमें रवि शास्त्री, मोहम्मद अजहरुद्दीन और सचिन तेंदुलकर को अपना शिकार बनाया था. ये तीनों खिलाड़ी LBW आउट हुए थे. शारजाह में खेले गए विल्स ट्रॉफी के इस फाइनल मुकाबले में पाकिस्तान ने भारत को 72 रनों से जीत दर्ज की थी.
इस मैच में आकिब जावेद ने घातक गेंदबाजी करते हुए टीम इंडिया के रवि शास्त्री, नवजोत सिंह सिद्धू, संजय मांजरेकर, कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन, सचिन तेंदुलकर, कपिल देव और मनोज प्रभाकर को अपना शिकार बनाया था. उन्होंने 10 ओवर की बॉलिंग में 1 मेडेन डालते हुए 37 रन देकर 7 बल्लेबाजों को वापस पवेलियन की राह दिखाई थी.