सचिन तेंदुलकर ने दिवगंत कोच आचरेकर को याद किया

सचिन ने कहा, सर ने मुझे वो सब भूल जाने को कहा, जो उन्होंने मुझे बताया था और मुझे पहले की ग्रिप से पकड़ने को कहा।

Edited By : Cricket Country Staff |Jan 10, 2019, 11:01 PM IST

Published On Jan 10, 2019, 11:01 PM IST

Last UpdatedJan 10, 2019, 11:01 PM IST

Sachin Tendulkar recollected how the revered coach, who died here last week aged 87, asked him to go back to his original low grip after advising him to hold the bat higher and seeing it did not work well. @ Twitter

महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, पूर्व भारतीय बल्लेबाज विनोद कांबली और प्रवीण आमरे ने गुरूवार को यहां शोक सभा में अपने बचपन के कोच रमाकांत आचरेकर की यादों को ताजा किया। कोच आचरेकर का पिछले हफ्ते यहां निधन हो गया था, वह 87 वर्ष के थे।

तेंदुलकर ने याद करते हुए कहा, ‘‘मुझे अब भी याद है कि जब मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था, हमारे पास सिर्फ एक बल्ला था जो मेरे भाई अजीत तेंदुलकर का था। यह थोड़ा सा बड़ा था और मेरी ग्रिप हैंडल पर नीचे होती थी।’’

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उन्होंने यहां शिवाजी पार्क जिमाखाना में हुई शोक सभा में कहा, ‘‘सर ने कुछ दिन के लिये यह देखा और फिर मुझे एक तरफ ले गये और मुझे बल्ले को थोड़ा ऊपर से पकड़ने को कहा।’’

तेंदुलकर ने कहा, ‘‘सर ने मुझे खेलते हुए देखा और कहा कि यह कारगर नहीं हो रहा क्योंकि मेरा बल्ले पर वैसा नियंत्रण नहीं बन पा रहा और मेरे शाट भी नहीं लग रहे हैं। यह देखने के बाद कि मेरा बल्ले पर वैसा ही नियंत्रण नहीं है, सर ने मुझे वो सब भूल जाने को कहा जो उन्होंने मुझे बताया था और मुझे पहले की ग्रिप से पकड़ने को कहा।’’

तेंदुलकर ने कहा, ‘‘इससे सर ने मुझे ही नहीं बल्कि सभी को बड़ा संदेश दिया कि कोचिंग का मतलब हमेशा बदलाव करना ही नहीं होता। कभी कभार यह अहम होता है कि कोचिंग नहीं दी जाये।’’

इस महान बल्लेबाज ने अपने 24 साल के करियर में 200 टेस्ट खेले हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अगर मेरी ग्रिप बदल गयी होती तो मुझे लगता है कि मैं इतने लंबे समय तक नहीं खेला होता। लेकिन सर के पास दूरदृष्टि थी कि मेरा गेम कैसे बेहतर हो सकता है और मेरे लिये क्या मुफीद रहेगा।’’

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