Sachin Tendulkar’s coach Ramakant Achrekar dies aged 87 in mumbai
On every Gurupurnima, Tendulkar does not fail to seek the blessings of his coach. Photo–Sachin Twitter

दिग्‍गज सचिन तेंदुलकर के करियर को संवारने वाले द्रोणाचार्य पुरस्कार प्राप्त क्रिकेट कोच रमाकांत आचरेकर का बुधवार को मुंबई में निधन हो गया।

वह 87 वर्ष के थे। उनके परिवार के एक सदस्य ने बताया कि बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारियों के कारण उनका निधन हो गया। उनके रिश्तेदार रश्मि दलवी ने बताया, ‘आचरेकर सर हमारे बीच नहीं रहे। उनका आज शाम निधन हो गया।’

आचरेकर ने साल 1983 में विश्व विजेता रही भारतीय क्रिकेट टीम के कई खिलाड़ियों को कोचिंग दी थी। बलविंदर सिंह संधु से लेकर दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर तक को आचरेकर ने क्रिकेट के गुर सिखाए। सचिन के अलावा बाएं हाथ के बल्लेबाज विनोद कांबली और प्रवीण आमरे भी आचरेकर के शिष्य रहे थे।

तेंदुलकर के बचपन के कोच आचरेकर 1990 में द्रोणाचार्य और 2010 में  पद्मश्री सम्‍मा‍न से सम्‍मानित किए गए थे।

अपने सफल क्रिकेट करियर में द्रोणाचार्य अवार्डी  कोच रमाकांत आचरेकर के बारे में महान क्रिकेटर तेंदुलकर कई बार कह चुके हैं कि कोच और गुरू माता-पिता की तरह होते हैं। कोच आचरेकर दिग्‍गज तेंदुलकर को मुंबई के दादर के शिवाजी पार्क में कोचिंग देते थे।

आचरेकर ने अपने करियर में सिर्फ एक प्रथम श्रेणी मैच खेला लेकिन उन्हें सर डॉन ब्रैडमैन के बाद दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेटर तेंदुलकर को तलाशने और तराशने का श्रेय जाता है ।

क्रिकेट को अलविदा कह चुके तेंदुलकर के नाम बल्लेबाजी के लगभग सारे रिकॉर्ड है। उन्होंने टेस्ट में सर्वाधिक 15, 921 और वनडे में सबसे ज्यादा 18, 426 रन बनाए हैं।

तेंदुलकर ने पिछले साल एक कार्यक्रम में अपने करियर में आचरेकर के योगदान के बारे में कहा था, ‘सर मुझे कभी ‘वेल प्लेड’ नहीं कहते थे लेकिन मुझे पता चल जाता था जब मैं मैदान पर अच्छा खेलता था तो सर मुझे भेलपुरी या पानीपुरी खिलाते थे।’

आचरेकर ने सचिन को बचपन से ही ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी थी। इसी का नतीजा रहा कि सचिन क्रिकेट के भगवान बन गए। हालांकि इसमें सचिन की प्रतिभा अहम रही।

(इनपुट-भाषा)