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सचिन तेंदुलकर के क्रिकेट को अलविदा कहने के मौके पर पूर्व तेज गेंदबाज सुरु नायक ने एक दिलचस्प वाकया साझा किया। उन्होंने बताया कि वह 1987-88 घरेलू सीजन में बड़ौदा के खिलाफ मैच के दौरान सचिन के पहले रूममेट थे। सचिन ने साल 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ कराची टेस्ट के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। डेब्यू करने के वक्त सचिन की उम्र 16 साल थी। सचिन भारत ही नहीं दुनिया के सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले क्रिकेटर्स में से एक हैं।

सुरु ने एक इंटरव्यू में बताया, “सचिन 15 साल की उम्र में बहुत शर्मीले थे। मैं टीम का सबसे सीनियर खिलाड़ी था इसलिए मैनेजमेंट ने सोचा कि ये बढ़िया होगा कि नए नवेले खिलाड़ी सीनियर खिलाड़ियों के साथ रूम शेयर करें। कप्तान चंद्रकांत पंडित ने कहा था कि युवा खिलाड़ियों पर नजर रखो। बहरहाल, रूम के अंदर सचिन खासे व्यस्त थे- वह स्पिनर्स और तेज गेंदबाजों के खिलाफ अपने शॉट की प्रैक्टिस कर रहे थे। लेकिन जैसे ही वह मैदान पर जाते वह अपने में ही खो जाते। वह ज्यादा बात नहीं करते थे। वह ऑटोग्राफ देने में भी शर्माते थे। उस समय रणजी ट्रॉफी के मैचों के लिए लोग भारी मात्रा में आते थे और लोग सचिन तेंदुलकर की भविष्य के स्टार के रूप में साख को जानते थे। मुझे लगता है कि उनके व्यवहार को बदलने के लिए उनके भाई अजीत को श्रेय दिया जाना चाहिए। यहां तक कि सचिन शैतान नहीं थे लेकिन विनोद कांबली खासे शैतान थे।”

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नायक ने बताया, “उस उम्र में भी वह स्पेशल थे। वह पतले थे, लेकिन चीजों को बड़ी तल्लीनता से देखते थे। उनके देखने की शक्ति खासी उत्कृष्ट थी। उन्होंने उस सीजन में कोई मैच नहीं खेला लेकिन वह नेट में बैटिंग करते हुए मुंबई टीम की ओर से खेलने को लेकर तैयार थे। मैं तब अपना आखिरी सीजन खेल रहा था। लेकिन मुंबई के पास अनूप सबनिस और राजू कुलकर्णी के रूप में दो अच्छे तेज गेंदबाज थे। वे काफी फुर्तीले थे। लेकिन सचिन ने उनका सामना बड़ी आसानी के साथ नेट्स में किया। तभी हमें पता चल गया था कि यह लड़का एक दिन बड़ा नाम करेगा।”