न्‍यूजीलैंड के खिलाफ (India vs New Zealand) दो मैचों की टेस्‍ट सीरीज के दौरान भारत को 0-2 से हार झेलनी पड़ी. भारत पहला मुकाबला 10 विकेट और दूसरा मैच सात विकेट से हारा. भारत की 1983 वर्ल्‍ड कप विजेता टीम के सदस्‍य संदीप पाटिल (Sandeep Patil) दोनों ही मैचों के दौरान उपकप्‍तान अजिंक्‍य रहाणे (Ajinkya Rahane) के खेलने के अंदाज से नाराज हैं. उन्‍होंने यहां तक कहा डाला कि अगर क्रीज पर महज खड़े रहना ही क्रिकेट है तो बेहतर होगा कि सिक्‍योरिटी गार्ड को खड़ा कर दिया जाए.

टाइम्‍स ऑफ इंडिया से बातचीत के दौरान संदीप पाटिल (Sandeep Patil) ने कहा, “इस सीजन में मुंबई के लिए खेलते वक्‍त मैंने अजिंक्‍य रहाणे के धीमी गति से रन बनाने के बारे में सुना था. नाकाम होने के डर के चलते ऐसा होता है. वो भारतीय टीम की अगुवाई कर चुका है. ओवरसीज में उसका रिकॉर्ड भी शानदार है, लेकिन वो सब अब इतिहास बन चुका है.”

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न्‍यूजीलैंड के खिलाफ दो मैचों की चार पारियों में अजिंक्‍य रहाणे (Ajinkya Rahane) ने महज 22.74 की औसत से 91 रन बनाए. संदीप पाटिल (Sandeep Patil) ने कहा, “रहाणे अब भारत के सीमित ओवरों के क्रिकेट से बाहर है. उसपर केवल टेस्‍ट क्रिकेटर होने का ठप्‍पा लग गया है. मानवीय प्रव्रिति यह कहती है कि कोई भी खिलाड़ी ऐसी परिस्थिति में खुद को टेस्‍ट स्‍पेशलिस्‍ट के रूप में स्‍थापित करने का प्रयास करेगा. रहाणे अपने आप को साबित करने का प्रयास कर रहा है.”

उन्‍होंने कहा, “ऐसा करके आप यह साबित करने की कोशिश कर रहे हो कि तकनीकी रूप से आप सही हो. आप केवल क्रीज पर खड़े रहने की कोशिश कर रहे हो. आपको केवल किसी को मैदान पर खड़ा ही रखना है तो बेहतर होगा कि सिक्‍योरिटी गार्ड को लाकर मैदान पर खड़ा कर दिया जाए. आप बताइये कि ऐसी स्थिति में रन कौन बनाएगा.”

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संदीप पाटिल (Sandeep Patil) ने आगे कहा, “मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप अपना बल्‍ला फेंक दें. खेल का बचाव करने के लिए आपके पास काफी शतक हैं. मैं बस इतना कह रहा हूं कि खेल के प्रति आपकी अप्रोच ठीक नहीं है. मेरे जैसा साधारण खिलाड़ी भी विदेशी सरजमीं पर टिकने में कामयाब रहा. रहाणे (Ajinkya Rahane) तो एक चैंपियन खिलाड़ी है.”