Shane Warne’s ‘Ball of the Century’ is Dream delivery of every leg spinner: Yuzvendra Chahal
युजवेंद्र चहल (IANS)

साल 1993 की एशेज सीरीज के दौरान ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज स्पिनर शेन वार्न ने इंग्लिश बल्लेबाज को एक ऐसी गेंद पर आउट किया था जो किसी भी लेग स्पिनर के लिए ड्रीम डिलीवरी मानी जाती है। वार्न की इस गेंद को बॉल ऑफ द सेंचुरी कहा जाता है और हर स्पिनर की तरह टीम इंडिया के युजवेंद्र चहल भी उस गेंद के बड़े प्रशसंक है।

चहल ने बताया कि जब उन्होंने वार्न की उस गेंद का वीडियो देखा था तो उन्हें लगा कि उन्हें भी इसी तरह बल्लेबाजों को आउट करना चाहिए। उन्होंने कहा, “जब मैंने शेन वार्न सर की गेंदबाजी के वीडियो देखना शुरू किया, तब मुझे पता चला कि लेग स्पिन क्या होती है। वो मेरे आदर्श हैं और मैं उनके जैसा गेंदबाजी करना चाहता हूं। मैं जिस तरह से बल्लेबाज को फंसाता था, उससे मैं इसका आनंद लेता हूं। मैंने हमेशा उनका वीडियो देखकर उनसे काफी कुछ सीखा है।”

भारतीय स्पिनर ने कहा, “मैं उनके सभी वीडियो देखता था, और खास तौर पर उन्होंने जिस तरह से माइक गैटिंग को गेंदबाजी की थी, वो हर एक लेग स्पिनर की ड्रीम डिलीवरी है। मुझे लगा कि मुझे भी एक बार उसी तरह से बल्लेबाज को आउट करना चाहिए और न्यूजीलैंड दौरे के दौरान ऐसी ही हुआ, जब मैंने मार्टिन गुप्टिल को आउट किया था। मुझे लगता है कि ये मेरी स्पेशल डिलीवरी थी।”

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भारतीय क्रिकेट टीम के लिए अब तक 54 वनडे और 45 टी-20 मैच खेल चुके चहल पहले मध्यम तेज गेंदबाज थे, लेकिन बाद में अपने पिता की सलाह पर उन्होंने लेग स्पिन करना शुरू कर दिया था। चहल ने कहा, “शुरुआत में स्कूल में, मैं मध्यम तेज गति की गेंदबाजी करता था। बाद में, पिता ने मुझसे कहा कि मध्यम तेज गेंदबाजों को एक उचित शरीर की आवश्यकता होती है और इसमें चोटिल होने का भी खतरा होता है। बाद में पता नहीं मुझे क्या हुआ कि मैंने लेग-स्पिन गेंदबाजी करना शुरू कर दिया।

उन्होंने कहा, “मैंने महसूस किया कि गेंद लेग स्पिन हो रही थी और इससे बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी, इसलिए मुझे लेग-स्पिन गेंदबाजी करने में अधिक आनंद आता है। मुझे लगता है कि पिताजी ने मुझे इसका एहसास कराया। उन्होंने कहा मुझसे कहा कि आप क्या चाहते हैं, क्या आप मीडियम पेसर या लेग स्पिनर बनना चाहते हैं, इस पर अधिक समय है। आपको यह समझना होगा कि आप क्या करने में सक्षम है।”