भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पहली कप्तान है शांता रंगास्वामी Photo Courtesy: Shantha Rangaswamy Facebook Page
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पहली कप्तान है शांता रंगास्वामी Photo Courtesy: Shantha Rangaswamy Facebook Page

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आयोजित बीसीसीआई अवॉर्ड कार्यक्रम में पहली बार किसी महिला क्रिकेटर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह खिलाड़ी है भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पहली कप्तान शांता रंगास्वामी जिन्हें क्रिकेट जगत में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए इस खिताब से नवाजा गया। उन्हें यह पुरस्कार पूर्व भारतीय कप्तान अजीत वाडेकर के हाथों दिया गया है। रंगास्वामी ने यह खिताब 1973 से 2006 तक भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा रही सभी महिलाओं को समर्पित किया।

पूर्व भारतीय ऑलराउंडर ने कहा, “यह पहली बार है जब किसी महिला को यह अवॉर्ड मिला है लेकिन मुझे पता है कि यह आखिरी नहीं होगा। मैंने सुना जब फारुख ने कहा कि उन्हें क्रिकेट खेलने के लिए 250 रुपए ही मिलते थे। हमारे लिए यह बहुत बड़ी कीमत होती क्योंकि हमें हमारे खेल के लिए कभी कोई वेतन नहीं मिला। मैंने साल 1973 में खेलना शुरु किया था और 1994 में क्रिकेट छोड़ा था, इस दौरान मुझे या किसी भी साथी खिलाड़ी को कोई वेतन नहीं मिला। यह खेल के प्रति जूनून ही था जिसने हमें खेलने के लिए प्रेरित किया। लेकिन आज चीजें काफी बदली है। ट्रेन की अनारक्षित द्वितीय श्रेणी में सफर करना, खख्त विकेट पर खेलना यह सब कल की बातें हैं।” रंगास्वामी ने यह भी कहा कि विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों की उपलब्धियां सब जानते हैं लेकिन महिला क्रिकेटरों को पहचान मिलना मुश्किल होता है। उन्होंने बीसीसीआई को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद देते हुए कहा, “1991 के बाद चीजें काफी बेहतर हुई। 2006 के बाद जब बीसीसीआई हरकत मे आया तो महिला क्रिकेट में बहुत सकारात्मक बदलाव आए। यह महिला क्रिकेट के लिए अच्छी बात हैं।” [ये भी पढ़ें: आईसीसी महिला विश्व कप के पहले मुकाबले में भारत का सामना इंग्लैंड से]

पूर्व भारतीय कप्तान ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ अपनी एक मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया, “1977 से 1984 तक हमारी टीम शीर्ष पर थी लेकिन हमें कोई भी अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलने को नहीं मिल रहा था। कई अधिकारी बदले थे और इसी बीच महिला क्रिकेट के सचिव की लड़ाई तत्कालीन खेल मंत्री से हो गई थी जिस वजह से हमें बाहर जाकर खेलने की अनुमति नहीं मिल रही थी। तब मैने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी से मुलाकात की और उन्होंने हमें आश्वासन दिया कि वह हमारी टीम को स्पांसर करेंगे लेकिन फिर भी हम उस टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सके। दरअसल ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड ने यह कहकर मना कर दिया था कि वह पूरी तैयारियां करने में असमर्थ हैं।” रंगास्वामी ने यह भी कहा कि तब उनकी टीम लगातार इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से मिलती थी लेकिन उसके बाद से आजतक भारतीय महिला टीम किसी भी प्रधानमंत्री से नहीं मिली।