Sourav Ganguly: Conflict of interest is preventing best cricketers from working in Indian cricket administration
राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली © AFP

बीसीसीआई के भावी अध्यक्ष सौरव गांगुली ने सोमवार को कहा कि ‘हितों का टकराव’ भारतीय क्रिकेट के सामने सबसे बड़े मुद्दों में से एक है क्योंकि इसके विवादास्पद नियम सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटरों को इस खेल के प्रशासन में आने से रोक रहे है।

गांगुली खुद भी हितों के टकराव के मुद्दे का सामना कर चुके है। उन पर बंगाल क्रिकेट संघ (सीएबी) और आईपीएल फ्रेंचाइजी दिल्ली कैपिटल्स के मेंटोर रहने के कारण दोहरी भूमिका निभाने का आरोप लगा था।

वो पहले ही दिल्ली कैपिटल्स से अलग हो चुके हैं जबकि 23 अक्टूबर को बीसीसीआई अध्यक्ष का पद भार संभालने के बाद वो सीएबी के अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे देंगे।

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एन.श्रीनिवासन, राजीव शुक्ला और निरंजन शाह जैसे दिग्गज क्रिकेट प्रशासकों के साथ नामांकन दाखिल करने के बाद गांगुली ने पत्रकारों से कहा, ‘‘हितों का टकराव का मुद्दा बड़ा है। और मुझे ये नहीं पता है कि मैं सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटरों की सेवाएं ले पाऊंगा या नहीं क्योंकि उनके पास दूसरे विकल्प भी मौजूद होंगे।’’

गांगुली ने साफ किया कि ‘एक व्यक्ति एक पद’ के मौजूदा नियम क्रिकेट के पूर्व दिग्गजों को प्रशासन में आने से रोकेगा क्योंकि उन्हें अपनी आजीविका कमाने की भी जरूरत होगी।

पूर्व भारतीय कप्तान क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) का हिस्सा थे जिसके खिलाफ मध्यप्रदेश क्रिकेट संघ के सदस्य संजीव गुप्ता ने आचरण अधिकारी डीके जैन को कई शिकायतें की। इन शिकायतों के बाद सीएसी को भंग कर दिया गया था।

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गांगुली ने कहा कि इस उपबंध (हितों के टकराव से जुड़ा नियम) से भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप विभिन्न नियुक्तियों को देखे सब के साथ कुछ ना कुछ मामला है। इसमें एनसीए या सीएसी या बल्लेबाजी, फील्डिंग कोचों की नियुक्ति पर भी सवाल उठे। कमेंटेटरों और आईपीएल को भी लेकर मुद्दे रहे हैं। ये भारतीय क्रिकेट के लिए गंभीर मुद्दा है जिसे जल्द ही हल किये जाने की जरूरत है।’’