Sourav Ganguly: Dad wanted me to retire when Greg Chappell didn’t pick me in the team
सौरव गांगुली-ग्रैग चैपल © AFP

पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली और पूर्व भारतीय कोच ग्रैग चैपल के बीच विवाद के बारे में सभी जानते हैं लेकिन अब गांगुली ने इस मामले को लेकर एक नया खुलासा किया है। वर्तमान कैब अध्यक्ष ने कहा है कि जब तत्कालीन कोच ग्रेग चैपल ने उन्हें भारतीय टीम से बाहर कर दिया था, तब उनके पिताजी से उनका ये संघर्ष बर्दाश्त नहीं हो रहा था और  वो चाहते थे गांगुली क्रिकेट से संन्यास ले ले।

दिलीप वेंगसरकर की अध्यक्षता वाली चयनसमिति ने उनसे चर्चा नहीं की।’’ गांगुली ने कुंबले से अगला सवाल किया कि क्या वह मानते हैं कि उनकी टीम को उनकी सेवाएं चाहिए? ‘‘कुंबले के जवाब से मैं संतुष्ट हुआ। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें फैसला करना होगा तो वह उन्हें फिर से आगामी टेस्ट मैच के लिये चुनेंगे। इससे मुझे काफी राहत मिली।’’

चयनकर्ताओं को कड़ा संदेश देने के लिये गांगुली घरेलू क्रिकेट में खेले। यहां तक कि उन्होंने चंडीगढ़ में जेपी अत्रे मेमोरियल ट्रॉफी में भी हिस्सा लिया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले दो टेस्ट मैचों के लिये जल्द ही टीम घोषित की गयी और गांगुली उसमें शामिल थे। इसके साथ ही बोर्ड प्रेसीडेंट इलेवन टीम भी घोषित की गयी। यह दूसरे दर्जे की टीम थी जो चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया से भिड़ती।

गांगुली ने लिखा है, ‘‘बोर्ड प्रेसीडेंट में युवा खिलाड़ियों या उन्हें रखा जाता था जिनका टेस्ट करियर अनिश्चित हो। मुझे इसमें भी शामिल किया गया। यह टीम कृष्णमाचारी श्रीकांत की अगुवाई वाली नई चयनसमिति ने चुनी थी लेकिन लगता था कि उसकी सोच भी पहली वाली समिति की तरह ही थी। संदेश साफ था कि ये 100 से अधिक टेस्ट मैच खेल चुके सौरव गांगुली का फिर से ट्रॉयल था। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं बहुत गुस्से में था। तब मैंने अपने पिताजी से कहा कि मुझे अभी संन्यास ले लेना चाहिए। अब बहुत हो चुका। मेरे पिताजी थोड़ा हैरान थे। इससे पहले जब ग्रेग चैपल ने मुझे टीम से बाहर रखा और मैं वापसी के लिये संघर्ष कर रहा था तब वो चाहते कि मैं संन्यास ले लूं क्योंकि उनसे अपने बेटे का संघर्ष नहीं देखा जा रहा था।’’ गांगुली ने कहा, ‘‘तब मैंने उनका विरोध किया था। मैंने कहा बापी आप इंतजार करो। मैं वापसी करूंगा। मुझमें अब भी क्रिकेट बाकी है। इसलिए तीन साल बाद जब उन्होंने उसी व्यक्ति से संन्यास की बात सुनी तो वो हैरान थे। ’’

गांगुली ने कहा कि उन्होंने कुंबले से बात की और उन्होंने जल्दबाजी में फैसला नहीं करने के लिए कहा था। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उसे आश्वस्त किया लेकिन अंदर से मुझे लग गया था कि अब समय आ गया है। मैंने मन बना लिया था कि मैं इस सीरीज में कोई कसर नहीं छोड़ूंगा। क्रिकेट इतिहास गवाह है कि मेरी अंतिम सीरीज शानदार रही। मैंने मोहाली में शतक जमाया और नागपुर में करीबी अंतर से चूक गया था।’’ गांगुली ने कहा कि जब उन्हें 2008 में ईरानी ट्राफी के लिए शेष भारत की टीम में नहीं चुना गया तो वह ‘गुस्सा’ और ‘मायूस’ थे। इसके कुछ महीने बाद उन्होंने संन्यास की घोषणा कर दी थी।