ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान ग्रेग चैपल (Greg Chappell) भारत के सबसे विवादित कोच रहे हैं. भारतीय टीम की सूरत बदलने का श्रेय आज भी पूर्व कप्तान सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) को ही दिया जाता है. लेकिन जब चैपल भारतीय टीम के कोच बने तो गांगुली के साथ उनकी नोंक-झोंक खूब सुर्खियो में रही. चैपल के कोच बनने के बाद गांगुली को न सिर्फ कप्तानी छोड़नी पड़ी बल्कि वह करीब डेढ़ साल तक टीम इंडिया से बाहर भी रहे.

चैपल ने एक बार फिर अपने कोचिंग काल के लम्हों को याद किया है. इस बीच उन्होंने गांगुली के साथ अपने विवादों को एक बार फिर हवा दी है. चैपल ने गांगुली पर एक बार फिर आरोप लगाया है कि वह बतौर खिलाड़ी अपनी क्रिकेट में सुधार नहीं करना चाहते थे और टीम का कप्तान बने रहकर चीजों को काबू में रखना चाहते थे.

चैपल को 2007 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखकर भारतीय टीम का कोच नियुक्त किया गया था. गांगुली के बाद राहुल द्रविड़ ने टीम इंडिया की कमान संभाली थी. वह करीब दो साल (2005-07) तक भारतीय टीम के कोच रहे. वह हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के एक पोडकास्ट कार्यक्रम में अपने क्रिकेट जीवन की कहानियों पर चर्चा कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने भारतीय क्रिकेट के कोच बनने पर भी बात की.

इस पोडकास्ट कार्यक्रम में चैपल ने दावा किया कि 2007 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम भले ही टूर्नामेंट में फ्लॉप साबित हुई थी और टूर्नामेंट के पहले ही राउंड में वह बाहर हो गई. लेकिन इसके बावजूद बीसीसीआई ने उन्हें टीम इंडिया की कोचिंग के लिए दोबारा ऑफर दिया था.

चैपल ने आगे कहा, ‘लेकिन भारत में वह दो साल खूब चुनौतीपूर्ण थे और वहां हर मोर्चे पर चुनौतियां थीं. उनकी आशाएं बेतुकी थीं. भारतीय लोग क्रिकेट के प्रति कट्टर हैं. उन्होंने यहां यह भी स्वीकार की किया वह भारत के कोच इसलिए ही बने थे क्योंकि गांगुली ने उनसे ऐसा आग्रह किया था.’

72 वर्षीय चैपल ने कहा कि राहुल द्रविड़ ने उस भारतीय टीम को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम बनाने में काफी मेहनत की थी लेकिन टीम के बाकी सीनियर खिलाड़ी ऐसा नहीं कर रहे थे. सौरव गांगुली के बाहर होने से वे बिल्कुल असुरक्षित महसूस कर रहे थे कि अगर गांगुली बाहर हो सकते हैं तो फिर टीम का कोई भी खिलाड़ी बाहर हो सकता है. वे ऐसा इसलिए सोचते थे क्योंकि उनमें से ज्यादा तक क्रिकेट करियर अपने अंतिम पड़ाव पर था.

भारतीय टीम के इस पूर्व कोच ने गांगुली के साथ अपने तब के विवादों पर कहा, ‘गांगुली के कप्तान रहते हुए कुछ दिक्कतें थीं. एक तो वह मेहनत बिल्कुल नहीं करना चाहते थे. वह अपनी क्रिकेट में सुधार करने के इच्छुक नहीं थे. वह बस बतौर कप्तान टीम में बने रहना चाहते थे ताकि वह चीजों पर अपना नियंत्रण रख सकें.’