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टीम इंडिया के सबसे बेहतरीन कप्तानों में से एक सौरव गांगुली ने हाल ही में एक ईवेंट में शामिल होने के दौरान अपने करियर के सबसे बुरे दौर का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे ग्रैग चैपल के कोच बनने के बाद उन्हें टीम इंडिया की कप्तानी से हटा दिया गया और यहां तक कि उन्हें टीम से भी बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद वह कैसा महसूस कर रहे थे और उनके पिता ने उनका कैसे सहयोग किया। इस बारे में उन्होंने विस्तार से बताया।

गांगुली ने कहा, “मैं साल 2006-07 तक टीम इंडिया का कप्तान था। इसी बीच मुझे कप्तानी से इस्तीफा देने को कहा गया। क्योंकि उस समय टीम इंडिया के कोच बने ग्रेग चैपल को लगा कि मैं अब टीम इंडिया की कप्तानी करने लायक नहीं हूं। इसके बाद मैं करीब 6 महीने के लिए टीम इंडिया से बाहर हो गया। इसी दौरान मैं एक दिन रविवार की सुबह अपने पिता के साथ बैठा था। उन्होंने मुझसे कहा, ‘तुमने काफी क्रिकेट खेली है, तुमने टीम इंडिया के लिए करीब 350 गेम खेले हैं। अब ये मायने नहीं रखता कि तुम्हें और गेम खेलने को मिले या न मिलें, क्योंकि इन सालों में जो तुमने पाया है। वो हमेशा भारतीय क्रिकेट के इतिहास में बरकरार रहेगा।’

टीम से बाहर होने के बाद भी गांगुली ने टीम में वापसी को लेकर आस नहीं खोई थी क्योंकि उन्होंने क्रिकेट को पूरी जिंदगी जिया था और वह आखरी छड़ों में लोगों को ये कहने का मौका नहीं देना चाहते थे कि उन्होंने वापसी करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने आगे कहा, “मैंने उनसे (पिता से) एक शब्द नहीं कहा क्योंकि मैं समझ गया था कि वह मुझे इस तरह से नहीं देख रहे थे कि मैं असल में उस वक्त का आनंद ले रहा था। जब आपको पता चलता है कि आपको वो मौका आपकी स्किल के कारण नहीं मिल रहा है। तब ये आपके लिए थोड़ा कठिन हो जाता है। क्योंकि आप रन बनाते हो तो भी आप सिलेक्ट नहीं होते, आप अच्छा खेलते हो तो भी आप सिलेक्ट नहीं होते। पिताजी के साथ मुद्दा वहीं खत्म हो गया। इसके तीन- चार दिन के बाद वे मेरे पास आए और कहा, ‘सौरव क्या तुमने पक्का किया है कि तुम्हें क्या करना है। क्योंकि हर सुबह जब मैं उठता हूं और अखबार ही हेडलाइन पढ़ता हूं कि हर भारतीय टीम की जीत के साथ गांगुली की राष्ट्रीय टीम में वापसी कठिन होती जा रही है।’ मैंने उस दिन भी उनको सुना और कुछ नहीं कहा। लेकिन एक दिन मैंने पक्का किया और उनसे कहा, मैं 33-34 साल का हूं। मैं खेलना चाहता हूं। क्योंकि स्पोर्ट्स में आप हमेशा नहीं खेलते हो।”

“एक उम्र होती है, उसके बाद गेम आपसे दूर चला जाता है। मेरे पास जिंदगी के 3 से 4 साल रह गए हैं और मैं कोशिश करना चाहता हूं। मुझे नहीं पता कि मैं फिर से टीम इंडिया के लिए खेलूंगा, शायद न भी खेलूं। क्योंकि ऐसा लग रहा है कि मैं न खेल पाऊं। लेकिन मैं खेलना चाहता हूं। मैं उस दौर से गुजरा और तीन-चार महीने के बाद टीम में जगह बनाई और 5 साल तक मैंने क्रिकेट खेली। जिस दिन मैंने क्रिकेट से संन्यास लिया, तो सचिन तेंदुलकर ने कहा, ‘सौरव आपके पूरे करियर में पिछले तीन-चार सालों में आपकों मैंने सबसे बेहतरीन अंदाज में खेलते हुए देखा है।’

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गांगुली ने आगे कहा, “मैं आप सबसे यह इसलिए कह रहा हूं क्योंकि सफलता के साथ असफलता भी आती है। लेकिन असफलता के बाद ही आपको अपनी सबसे बड़े खूबी के बारे में पता चलता है।”