Sourav Ganguly: Wish India had MS Dhoni in my 2003 World Cup side
Photo Courtesy: CricketCountry

सौरभ गांगुली मौजूदा समय में बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के अध्‍यक्ष हैं, लेकिन एक वक्‍त ऐसा था जब उन्‍हें अपने समय का सबसे सफलतम कप्‍तान माना जाता था। दादा के नाम से लोगों के बीच मशहूर सौरव गांगुली का जलवा ऐसा था कि उस समय चेयरनकर्ता भी उनकी बात को टाल नहीं पाते थे। गांगुली की कप्‍तानी में ही भारत ने साल 2003 में दक्षिण अफ्रीका की सरजमीं पर विश्‍व कप का फाइनल खेला था। साल 1983 में कपिल देव की कप्‍तानी में विश्‍व कप जीतने के 20 साल बाद भारत के पास यह मौका था कि वो दोबारा इतिहास रच पाते, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। फाइनल मुकाबले में भारत को ऑस्‍ट्रेलिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इस मुकाबले के 16 साल बाद दादा ने अपनी आत्‍मकथा लिखी है, जिसमें उन्‍होंने लिखा, “अगर मेरे समय में महेंद्र सिंह धोनी टीम में होता तो निश्चित तौर पर वर्ष 2003 में भारतीय टीम विश्‍व कप जीत पाती।”

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साल 2003 में जिस वक्‍त विश्‍व कप हुआ था तब महेंद्र सिंह धोनी अपना करियर बनाने के लिए जूझ रहे थे। उस दौरान वो रेलवे में नौकरी करते थे। रेलवे में उन्‍हें नौकरी भी क्रिकेट में अच्‍छा प्रदर्शन करने की बदौलत ही मिली थी। सौरव गांगुली ही धोनी को भारतीय टीम में लेकर आए थे। सौरव गांगुली धोनी की बैटिंग से इस कदर प्रभावित थे कि जब धोनी झारखंड के लिए खेलते थे तो उन्‍होंने धोनी को कोलकाता आकर खेलने की सलाह दी थी, लेकिन धोनी ने अपने स्‍टेट से ही क्रिकेट को जारी रखा।

यह सौरव गांगुली ही थे जिन्‍होंने धोनी को तीन नंबर पर बैटिंग करने का मौका दिया था। सौरव ने अपनी आत्‍मकथा में लिखा, “मैं वर्षों से ऐसे प्‍लेयर्स पर नजर रख रहा था जो दबाव में शांत रहते हों और अपनी काबिलियत के अनुसार मैच का रुख बदल सकें। इसी दौरान साल 2004 में मेरी नजर महेंद्र सिंह धोनी पर पड़ी थी। मै पहले दिन से ही धोनी का खेल पसंद करता था।”