दिनेश चंडीमल श्रीलंका टेस्ट टीम के कप्तान हैं © Getty Images (File photo)
दिनेश चांडीमल श्रीलंका टेस्ट टीम के कप्तान हैं © Getty Images (File photo)

भारत के खिलाफ पहले वनडे में मिली शर्मनाक हार के बाद श्रीलंका टीम की काफी आलोचना की जा रही है। दांबुला वनडे में श्रीलंकाई सलामी बल्लेबाजों को छोड़कर मेजबान टीम का कोई खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सका। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा था कि श्रीलंका के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज दिनेश चांडीमल को वनडे टीम में जगह क्यों नहीं दी गई। टेस्ट कप्तान चांडीमल ने पिछले दो साल में खेले 28 मैचों में 41.50 की औसत से 913 रन बनाए हैं जिसमें दो शतक और 7 अर्धशतक शामिल हैं। इन आंकड़ों को देखने के बाद भी श्रीलंका टीम के चयनकर्ताओं ने चांडीमल को वनडे टीम से बाहर क्यों रखा, इसका कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आ रहे हैं। मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चांडीमल को लेकर सवाल पूछे जाने पर टीम के अंतरिम कोच निक पॉथास ने कहा कि ये सवाल चयनकर्ताओं से पूछा जाना चाहिए।

पॉथास ने मैच के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “अगर ये मेरे बस में होता और हमारे पास नियंत्रण होता तो मैं आपको एक निश्चित समय देता कि कब टीम जीतना शूरू कर देगी। यह ऐसा सवाल है जिसका जवाब आपको कुछ और लोगों से पूछना चाहिए। मेरे लिए, अगर हमे कुछ समय के लिए अकेला छोड़ दिया जाय और आप इन खिलाड़ियों के साथ काम कर सके तो छह महीने के अंदर टीम में स्थिरता और निरंतरता आ सकेगी।” पॉथास का सीधा निशाना सनथ जयसूर्या के नेतृत्व वाली चयनसमिति की ओर था। [ये भी पढ़ें: सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ने से केवल एक कदम दूर हैं महेंद्र सिंह धोनी]

श्रीलंका टीम की चयनसमिति ने पिछले दो सालों में वनडे टीम में 50 से भी ज्यादा खिलाड़ियों को इस्तेमाल किया है। जिस वजह से श्रीलंका को उसके सर्वश्रेष्ठ 14-15 खिलाड़ी नहीं मिल पा रहे हैं। पॉथास ने आगे कहा, “अगर आप इन खिलाड़ियों को थोड़ा समय देंगे, इनका सही ख्याल रखेंगे और उनका हौसला बढ़ाएंगे तो आपको नतीजे जरूर मिलेंगे। ये सभी प्रतिभावान खिलाड़ी हैं।” पॉथास ने बताया कि खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ पूरी मेहनत करते हैं और वह खिलाड़ियों के बिल्कुल भी निराश नहीं हैं। [ये भी पढ़ें: लाहौर में ही खेली जाएगी पाकिस्तान बनाम वर्ल्ड XI टी20 सीरीज]

उन्होंने कहा, “आप दर्द और शर्म के बीच फंसे रहते हो। भावनात्मक तौर पर आपको गुस्सा आता है फिर आप निराश हो जाते हैं। क्या मैं खिलाड़ियों के नाराज हूं? बिल्कुल नहीं। वो अपनी ओर से पूरी मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने बेहतरीन काम किया है। सपोर्ट स्टाफ भी लाजवाब है। वह खिलाड़ियों के साथ घंटो तक लगातार काम करते रहते हैं। आप ड्रेसिंग रूम के अंदर मौजूद किसी भी शख्स पर इल्जाम नहीं लगा सकते। इस मैच में हम अपना सर्वश्रेष्ठ खेल नहीं खेले। आप गुस्से में हैं और ये जायज है। वो कहावत है ना कि बहुत ज्यादा करने की कोशिश में हमेशा ही गलतियां होती हैं।” पोथास के बयान से साफ है कि चयनकर्ताओं और खिलाड़ियों के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। जिसका प्रभाव टीम के प्रदर्शन पर पड़ रहा है।