Steve Smith feels claustrophobic on wearing helmet with stem guards
स्टीव स्मिथ (IANS)

लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान बिना नेक गार्ड वाला हेलमेट पहनकर खेल रहे ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज स्टीव स्मिथ के जोफ्रा आर्चर की गेंद पर चोटिल होने के बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया अपने खिलाड़ियों को लिए स्टेम गार्ड अनिवार्य करने पर विचार कर रहा है। हालांकि स्मिथ के लिए ऐसा करना काफी मुश्किल हो रहा है क्योंकि स्टेम गार्ड वाला हेलमेट पहनकर उन्हें बल्लेबाजी करने में परेशानी होती है।

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया वेबसाइट से बातचीत में स्मिथ ने कहा, “मैंने इसे पहले ट्राई किया था और पिछले दिनों बल्लेबाजी करते हुए भी इसका इस्तेमाल किया। मुझे याद है कि मेरी धड़कन काफी बढ़ गई थी। मुझे घुटन महसूस हो रही थी। मैं इसकी तुलना एमआरआई स्कैन मशीन के अंदर होने से करना चाहूंगा।”

हालांकि स्मिथ ने ये भी कहा कि वो आगे के मैचों में नेक गार्ड का इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि आगे चलकर एक समय पर ये अनिवार्य हो जाएंगे, इसलिए मुझे इसका आदी होना पड़ेगा। और मुझे यकीन है कि मैं जितना ज्यादा इसका इस्तेमाल करूंगा, इसे पहनकर अभ्यास करूंगा, मेरी धड़कन कम होती जाएगी और सब ठीक हो जाएगा।”

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लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान हुई घटना को याद कर स्मिथ ने कहा, “अगर मैंने उस मैच में स्टेम गार्ड पहना होता तो क्या फर्क पड़ता, वो मुझे नहीं पता। जिस तरह से मेरा सिर पीछे गया और गेंद मुझे लगी। जाहिर है, आप हमेशा ज्यादा से ज्यादा सावधानी बरतना चाहते हैं और मेरे लिए बात नेट्स में (खेलकर) इसकी (स्टेम गार्ड) आदत डालने की है।”

स्मिथ के स्टेम गार्ड वाला हेलमेट ना पहनने का दूसरा कारण है इसका उनके बल्लेबाजी रूटीन में फिट ना होना। स्मिथ के अनोखे बैटिंग रूटीन में कुछ और अजीबोंगरीब चीजें शामिल हैं, जैसे- अपने जूतों के फीतों पर टेप लगाना ताकि बल्लेबाजी करते हुए वो उन्हें ना दिखें और बार-बार बल्ला सही तरीके से पकड़ने का तरीका ढूंढने की कोशिश करना।

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इस बारे में स्मिथ ने कहा, “मैंने पहले भी कई बार कहा कि मैं भूल जाता हूं कि मैं बैट को किस तरह से पकड़ता हूं और उसे वापस ढूंढने की कोशिश करता हूं। कभी इसमें केवल 10 गेंद लगती हैं, कभी नेट में जाते ही ये ठीक हो जाता है और कभी कभार 100 से भी ज्यादा गेंद लग जाती हैं। लेकिन जब मुझे ये मिल जाता है तो ये सही दिखने की बात होती है- जब बैट मेरे पैर के ठीक पीछे दिखता है तो मैं समझ जाता हूं कि सब सही है।”