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भारतीय महिला फोर टीम ने बर्मिंगम 2022, कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता। भारत की लवली चौबे, पिंकी, रूपा रानी टिर्की, और नयनमोनी सैकिया ने इतिहास रच दिया। यह खेल भारत में कम लोकप्रिय है। बहुत कम लोगों को इस खेल की जानकारी है। भारतीय टीम जिसने यह स्वर्ण पदक जीता उसमें लवली चौबे भी हैं। लवली झारखंड में लॉन्ग जंप खेलती थीं। इसी दौरान वह चोटिल हो गईं और फिर बिहार क्रिकेट के अंपायर मधुकांत पाठक ने उन्हें लॉन बॉल में हाथ आजमाने के लिए बुलाया।

मधुकांत पाठक, एक पूर्व क्रिकेट अंपायर हैं। उन्होंने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा था, ‘पहले तो इसको स्पोर्ट्स मानते ही नहीं। इसके बाद तीन सेमीफाइनल हारने के बाद खिलाड़ियों को काफी आलोचनाओं को सामना करना पड़ा। खिलाड़ियों के पास मैच खेलने का कोई एक्सपोजर नहीं था। और फिर खिलाड़ियों से कहा जाता, ‘यह क्या बॉल को धक्का देते रहते हो और कहते हो स्पोर्टस है।”

पाठक ने पहली बार स्टीव वॉ को साल 2000 में मिले थे। जमशेदपुर में एक मैच के दौरान उनकी मुलाकात हुई। पाठक वहां चौथे अंपायर थे। इसके बाद जब 2003-04 में वह ऑस्ट्रेलिया गए। उन्होंने स्टीव वॉ को अपने घर में लॉन बॉल्स खेलते हुए देखा। स्टीव के भाई मार्क वॉ भी इस खेल में बहुत अच्छे थे।

उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में बताया था कि स्टीव वॉ ने उनसे कहा था, ‘यह क्रिकेट की तरह अच्छा है। यह क्रिकेट के लिए अच्छा वर्कआउट भी है। आपको बल्लेबाज की तरह झुकना पड़ा है। इससे ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे अहसास हुआ कि इसमें सीधा फिजिकल पैरामीटर्स नहीं है। 9 से 99 साल के बीच का कोई भी खेल सकता है। और यह भारतीय मानसिकता के लिए बहुत अच्छा है। हमें तनाव पसंद नहीं है। लेकिन हमारे पास तेज दिमाग है।’

इसके बाद वह ऑस्ट्रेलिया में रुके और कोच बनने की ट्रेनिंग ली। अन्य खेलों से रिजेक्ट हो चुके कई खिलाड़ी पाठक के शागिर्द बने। अब टीम के पास निरंतरता हासिल करने का जरूरी सॉफ्टवेयर भी है।