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काव्या मारन की टीम के फैसले पर भड़के सुनील गावस्कर, बोले- ऐसा नहीं करना चाहिए था

भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर काव्या मारन के फैसले से बहुत नाराज़ हैं. उन्होंने कहा है कि इससे बचा जाना चाहिए था.

user-circle cricketcountry.com Written by Bharat Malhotra
Last Updated on - March 17, 2026 8:16 AM IST

नई दिल्ली: भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने ‘द हंड्रेड’ की 2026 की नीलामी में पाकिस्तान के स्पिनर अबरार अहमद को साइन करने के सनराइजर्स लीड्स के फैसले की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संवेदनशील राजनीतिक संबंधों को देखते हुए भारतीय फ्रेंचाइजी मालिकों को पाकिस्तान के खिलाड़ियों को अपनी टीम में शामिल करने से बचना चाहिए.

गावस्कर ने यह सवाल भी उठाया कि क्या खेल में मिली सफलता राष्ट्रीय चिंताओं से ज्यादा अहम होनी चाहिए? उनका कहना है भारतीय स्वामित्व वाली संस्थाओं को ऐसे फैसलों के बड़े असर का ख्याल रखना चाहिए. क्योंकि अबरार द्वारा कमाए गए पैसे का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया जा सकता है.

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भारत के खिलाफ इस्तेमाल हो सकता है पैसा

गावस्कर ने ‘मिड-डे’ के लिए अपने कॉलम में लिखा, ‘द हंड्रेड में एक भारतीय मालिक वाली फ्रेंचाइजी द्वारा पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीदने पर जो हंगामा मचा है, वह बिल्कुल भी हैरानी की बात नहीं है. नवंबर 2008 में मुंबई हमलों के बाद से भारतीय फ्रेंचाइजी मालिकों ने आईपीएल के लिए पाकिस्तानी खिलाड़ियों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है.’

गावस्कर ने सुझाव दिया कि यह मुद्दा सिर्फ क्रिकेट से जुड़ी काबिलियत तक ही सीमित नहीं है. पूर्व भारतीय कप्तान के अनुसार, पैसे का जो लेन-देन होता है, जो खिलाड़ी को मिलने वाली फीस से शुरू होकर सरकार को दिए जाने वाले टैक्स तक जाता है, वह पाकिस्तानी खिलाड़ियों के साथ डील करते समय भारतीय मालिकों के सामने एक नैतिक दुविधा खड़ी कर देता है.

गावस्कर ने लिखा, ‘भले ही यह बात देर से समझ में आई हो, लेकिन अब यह एहसास हो रहा है कि वे पाकिस्तानी खिलाड़ी को जो फीस देते हैं, जिस पर वह अपनी सरकार को इनकम टैक्स देते हैं और वह सरकार उस पैसे से हथियार खरीदती है. इस तरह यह पैसा अनुचित ढंग से भारतीय सैनिकों और आम नागरिकों की जान जाने में योगदान देता है. इसी वजह से भारतीय संस्थाएं अब पाकिस्तानी कलाकारों और खिलाड़ियों को अपनी टीम में शामिल करने के बारे में सोचने से भी कतराती हैं.’

‘यह भारतीयों की जान जाने में योगदान देने जैसा’

गावस्कर ने आगे कहा, ‘चाहे पेमेंट करने वाली संस्था भारत की हो या उसी संस्था की कोई विदेशी सहायक कंपनी, अगर मालिक भारतीय है तो वह भारतीय लोगों की जान जाने में ही योगदान दे रहा है. बात इतनी ही सीधी और सरल है.’

भारत के इस पूर्व सलामी बल्लेबाज ने यह भी बताया कि भले ही टीम मैनेजमेंट खिलाड़ियों को साइन करने के फैसले को पूरी तरह से क्रिकेट के नजरिए से देखता हो, लेकिन फ्रेंचाइजी मालिकों को ऐसे फैसले लेने से पहले देश पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों पर भी जरूर विचार करना चाहिए.

‘फ्रैंचाइजी मालिक को होनी चाहिए इसकी समझ’

सुनील गावस्कर ने कहा, ‘द हंड्रेड में टीम के कोच डेनियल विटोरी, जो न्यूजीलैंड के रहने वाले हैं. वह शायद इस सीधी-सी बात को न समझते हों और इसीलिए वह अपनी टीम में कुछ पाकिस्तानी खिलाड़ियों को शामिल करना चाहते हों. हालांकि, फ्रेंचाइजी के मालिक को तो निश्चित रूप से इस स्थिति की पूरी समझ होनी चाहिए थी और उन्हें पाकिस्तानी खिलाड़ियों को खरीदने से मना कर देना चाहिए था. क्या किसी ऐसे फॉर्मेट में टूर्नामेंट जीतना – जिसे दुनिया का कोई और देश खेलता ही नहीं है – भारतीय लोगों की जान से कहीं ज्यादा अहम है?’

‘SRH का बहिष्कार भी हो सकता है’

गुरुवार को लंदन में हुई नीलामी के दौरान सनराइजर्स लीड्स ने अबरार अहमद को 1.90 लाख पाउंड (लगभग 2.34 करोड़ रुपये) में खरीदा. इस फ्रेंचाइजी का मालिकाना हक सन ग्रुप के पास है, जिसका नेतृत्व बिजनेसमैन कलानिधि मारन करते हैं. नीलामी के दौरान उनकी बेटी काव्या मारन, हेड कोच डेनियल विटोरी के साथ टीम का प्रतिनिधित्व कर रही थीं. अबरार को खरीदने के बाद से भारत में सनराइजर्स टीम की जमकर आलोचना हो रही है.

गावस्कर ने फ्रेंचाइजी को चेतावनी भी दी कि इस खरीद का असर आने वाले इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 में देखने को मिल सकता है और फैंस मुकाबलों का बहिष्कार कर सकते हैं या विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘इसमें कोई हैरानी की बात नहीं होगी कि यह टीम जो भी मैच खेलेगी, चाहे वह अपने घरेलू मैदान पर हो या बाहर, भारतीय फैंस की ओर से भारी विरोध प्रदर्शन होंगे. वे इस अविश्वसनीय खरीद का विरोध करेंगे.’