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बीसीसीआई के सदस्यों को एक और तगड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड के मुख्य अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। कार्यकारी अध्यक्ष सीके खन्ना, सचिव अमिताभ चौधरी और कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी से कारण पूछा गया है कि लोढ़ा समिति की सिफारिशें लागू क्यों नहीं की गईं? सर्वोच्च न्यायालय ने प्रशासकों की समिति (सीओए) से कहा कि वह बीसीसीआई के संविधान का नया ड्राफ्ट तैयार करे और उसे बेंच के सामने पेश करे। कोर्ट ने बीसीसीआई के तीनों कार्यकारी अधिकारियों को अगली सुनवाई में मौजूद रहने के लिए कहा है। अगली सुनवाई 19 सितंबर को होगी।

पिछले दिनों 16 अगस्त को प्रशासकों की समिति ने सुप्रीम कोर्ट के सामने तीखी रिपोर्ट पेश की थी और उसमें उन्होंने बीसीसीआई के सभी शीर्ष अधिकारियों को लोढ़ा पैनल सुधारों का पालन न करने के चलते हटाने की मांग रखी थी। एक अंग्रेजी से वेबसाइट से बातचीत में एक शीर्ष बीसीसीआई अधिकारी ने बताया कि वे इसका कारण बताएंगे कि क्यों लोढ़ा समिति के सुधारों को लागू करने में देरी हुई। नाम न बताने की शर्त पर बीसीसीआई अधिकारी ने कहा, “हम अपने संबंधित जवाब शीर्ष कोर्ट को भेज देंगे, और बताएंगे कि सुधार में देर क्यों हुई।”

पांचवीं स्टेटस रिपोर्ट में सीओए ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि बीसीसीआई के “शासन, प्रबंधन और प्रशासन” को उन्हें सौंप दिया जाए, आगे उन्होंने कहा था कि कि उन्हें प्रोफेशनल ग्रुप की जरूरत होगी, जिसको वर्तमान में बीसीसीआई सीईओ राहुल जोहरी हेड कर रहे हैं। स्टेटस रिपोर्ट में बीसीसीआई की ओर से लोकपाल नियुक्त न किए जाने की असफलता का भी जिक्र किया गया है।  ये भी पढ़ें: टेस्ट चैंपियनशिप पर आईसीसी का बड़ा फैसला!

बीसीसीआई साल 2016 सितंबर में जस्टिस एपी शाह के कार्यकाल के बाद से अबतक लोकपाल नियुक्त नहीं कर पाई है। सीओए ने इस बात का जिक्र किया है कि 6 रिटायर्ड जजों का नाम सुझाने के बावजूद बीसीसीआई ने निर्णय लेने का जिम्मा पदाधिकारियों को ही सौंपा। रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि नए फंड बांटने वाली नीति को अपनाने में भी आनाकानी की गई है क्योंकि सदस्य के बढ़ने से मौजूदा लोगों का शेयर कम हो जाएगा।